रायगढ़ जिले के महानदी के तटवर्ती क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से प्रभावित गांवों में राहत-बचाव कार्य जारी
रायगढ़, 27 सितंबर (हि.स.)। अर्णव तूफान के कारण छत्तीसगढ़ में चारों तरफ हुई भारी बारिश के चलते जहां महानदी और माण्ड नदी के जलस्तर में वृद्धि होने तथा गंगरेल बांध के 14 गेट खोले जाने के बाद महानदी में उफान आ गया, जिसके चलते चंद्रपुर के तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का पानी जहां प्रवेश कर गया। वहीं महानदी के तट पर बसे रायगढ़ जिले के आधा दर्जन गांव में बाढ़ की स्थिति पर सतत नजर रखे जाने के साथ साथ प्रभावित ग्रामीणों राहत एवं बचाव कार्य जारी है। बीती रात्रि हीराकुंड डेम के गेट खोल दिए गए हैं।
महानदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पुसौर विकासखंड अंतर्गत महानदी के तटीय क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। शासन के निर्देशानुसार एवं कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने रविवार काे बताया कि पुसौर विकासखंड के सूरजगढ़ और परसापाली गांव में महानदी का पानी पहुंचने के बाद प्रभावित ग्रामीणों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है। सूरजगढ़ में करीब 450 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए पड़ीगांव में राहत शिविर बनाया गया है, जहां लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है।
उन्हाेंने कहा कि शिविर में भोजन, पेयजल सहित आवश्यक व्यवस्थाएं प्रशासन द्वारा की जा रही हैं। परसापाली में भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित लोगों के लिए छिछोर उमरिया के स्कूल भवन में राहत शिविर बनाया गया है। यहां भी प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासन द्वारा महानदी के अन्य तटीय क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, ताकि पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एसडीएम महेश शर्मा सहित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारी मौके पर पहुंचकर जलस्तर, प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और राहत व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। पुसौर जनपद पंचायत के सीईओ, पंचायत सचिव, पटवारी तथा पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर उपस्थित रहकर राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि को रोकना है। इसके लिए संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी के साथ आवश्यकतानुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। ग्रामीणों से जलभराव वाले क्षेत्रों और नदी के आसपास जाने से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान

