कोरबा का प्रसिद्ध मां मड़वारानी मंदिर: आस्था, प्रकृति और लोकमान्यताओं का अनूठा संगम
काेरबा, 17 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित मां मड़वारानी मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। मड़वारानी पहाड़ की ऊंची चोटी पर कलमी वृक्ष के नीचे स्थित यह प्राचीन धार्मिक स्थल स्थानीय लोगों की श्रद्धा, विश्वास और पारंपरिक मान्यताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
मान्यता है कि मां मड़वारानी स्वयं प्रकट हुई थीं और आसपास के गांवों की रक्षा करती हैं। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह मंदिर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।
मां मड़वारानी मंदिर घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित है। यहां विभिन्न प्रकार के फूलों, फलदार वृक्षों और वनस्पतियों की भरमार है। पहाड़ पर बंदर और भालू सहित विभिन्न वन्यजीवों की मौजूदगी भी बताई जाती है। धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक वातावरण इस स्थल को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।
मंदिर तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से चार मार्ग प्रचलित हैं। सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला मार्ग पहाड़ के नीचे स्थित मंदिर से होकर जाता है। लगभग पांच किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर वाहन से पहुंचा जा सकता है। दूसरा मार्ग ग्राम बरपाली से होकर जाता है, जहां करीब एक किलोमीटर का रास्ता सीढ़ियों से होकर गुजरता है। इसके अलावा ग्राम झींका-महोरा से लगभग एक किलोमीटर तथा ग्राम खरहरी से करीब चार किलोमीटर लंबाई के मार्ग से भी पहाड़ पर पहुंचा जा सकता है।
मां मड़वारानी से जुड़ी कई लोककथाएं पीढ़ियों से प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, मां अपने विवाह मंडप यानी मड़वा को छोड़कर चली आई थीं। इसी घटना से इस क्षेत्र का नाम मड़वारानी पड़ने की लोकमान्यता है। कहा जाता है कि बरपाली-मड़वारानी मार्ग पर उनके शरीर से हल्दी एक बड़े पत्थर पर गिरी थी, जिससे वह पीला हो गया था। एक अन्य कथा के अनुसार, मां का भगवान शिव से कनकी में मिलन हुआ था, जिसके बाद वे मड़वारानी पर्वत पहुंचीं। संस्कृत परंपरा में उन्हें मांडवी देवी के नाम से भी जाना जाता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहाड़ की चोटी पर स्थित कलमी वृक्ष में नवरात्रि के दौरान जवारा उगने की घटनाएं भी देखी गई हैं।
श्रद्धालु इसे मां की शक्ति और आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं। एक अन्य लोककथा में कलमी वृक्ष से मीठे पानी का स्रोत निकलने का उल्लेख मिलता है।
मंदिर का मुख्य स्थल मड़वारानी पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर गहरी खाई के समीप स्थित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक कलमी वृक्ष कटने के बाद मां मड़वारानी अपनी चार बहनों के साथ यहां आईं और अपनी शक्ति पांच पत्थरों में स्थापित की। आज इन पांचों पत्थरों को पिंडी स्वरूप में पूजने की परंपरा है।
मां मड़वारानी मंदिर कोरबा जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नवरात्रि सहित विभिन्न अवसरों पर श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

