आजीविका डबरी ने बदली आदिवासी परिवारों की तकदीर, मछली पालन से बढ़ी आय और खेती बनी आत्मनिर्भर
धमतरी, 07 अगस्त (हि.स.)। शासन की ग्रामीण आजीविका एवं जल संरक्षण आधारित योजनाएं जिले के ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरी आज केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों के लिए स्थायी आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुकी है।
इसका प्रेरक उदाहरण विकासखंड नगरी की ग्राम पंचायत भोथापारा के अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राही सावित्री/फकीर एवं फकीर/हलालखोर हैं, जिन्होंने अपनी निजी भूमि पर बनी आजीविका डबरी में वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन शुरू कर अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। पहले इन परिवारों की आजीविका वर्षा आधारित खेती और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थी। सीमित कृषि भूमि, सिंचाई के अभाव और अनिश्चित मानसून के कारण नियमित आय नहीं हो पाती थी, जिससे कई बार रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ता था। योजना के तहत डबरी बनने से वर्षाजल का प्रभावी संचयन हुआ और पूरे वर्ष खेतों के लिए पानी उपलब्ध रहने लगा।
विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज डालकर मछली पालन शुरू किया गया। नियमित देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण मछलियों का अच्छा उत्पादन हुआ तथा विक्रय से अपेक्षा से अधिक आय प्राप्त हुई। अतिरिक्त आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, कृषि निवेश, घरेलू जरूरतों और खेती के विस्तार में किया गया, जिससे परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हुआ और आत्मविश्वास बढ़ा। डबरी में संचित जल से सिंचाई होने के कारण फसलों की उत्पादकता भी बढ़ी और वर्षभर कृषि गतिविधियां संचालित करना संभव हो सका। अब दोनों परिवार मछली पालन को नियमित व्यवसाय बनाकर इसका विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं तथा गांव के अन्य किसानों को भी डबरी के बहुउद्देशीय उपयोग और मत्स्य पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, तकनीकी मार्गदर्शन और हितग्राहियों की मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। धमतरी जिले में आजीविका डबरी जैसे नवाचार जल संरक्षण, कृषि विकास और आय संवर्धन के प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहे हैं, जो आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

