बलरामपुर : फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन

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बलरामपुर : फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों को मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन


बलरामपुर, 19 जून (हि.स.)। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कृषक उन्नति योजना के स्वरूप में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलों को अपनाने वाले किसानों के साथ-साथ पहले से दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास की खेती करने वाले किसानों को भी आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके लिए योजना के क्रियान्वयन संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

कृषि विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार कृषक उन्नति योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने एकीकृत किसान पोर्टल और एग्रीस्टेक पर पंजीयन कराया है। योजना के तहत ऐसे किसान पात्र होंगे जिन्होंने पिछले खरीफ सीजन में धान की फसल ली थी और आगामी खरीफ सीजन में धान के स्थान पर अन्य फसल लेने के लिए पंजीयन कराया है। इसके अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की खेती के लिए पंजीकृत किसान भी सहायता राशि प्राप्त कर सकेंगे।

योजना के तहत पात्र किसानों को एग्रीस्टेक में पंजीयन तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे की पुष्टि के बाद मान्य क्षेत्रफल पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किया जाएगा।

निर्देशों के अनुसार ट्रस्ट, मंडल, प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां, शाला विकास समितियां, केंद्र एवं राज्य शासन के संस्थान, महाविद्यालय तथा अन्य विधिक संस्थाएं इस योजना के लाभ के लिए पात्र नहीं होंगी। वहीं सहायता राशि का भुगतान कृषि भूमि सीलिंग कानून के प्रावधानों के अधीन किया जाएगा।

कृषि विभाग के अनुसार योजना का उद्देश्य फसल क्षेत्र, उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना, खेती की लागत कम करना तथा किसानों की आय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। साथ ही उन्नत बीजों के उपयोग, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन, कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश को बढ़ावा देना भी योजना का प्रमुख लक्ष्य है।

सरकार का मानना है कि बाजारोन्मुखी फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलने से कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी और किसानों को परंपरागत खेती से आगे बढ़कर बेहतर आय के अवसर प्राप्त होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

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