जांजगीर-चांपा में कोटवारों का धरना-प्रदर्शन, 15 हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक और नियमितीकरण की मांग

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जांजगीर-चांपा में कोटवारों का धरना-प्रदर्शन, 15 हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक और नियमितीकरण की मांग


मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

जांजगीर-चांपा, 23 अक्टूबर (हि. स.)। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में कोटवारों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। कोटवारों ने नियमितीकरण, राजस्व विभाग में संविलियन और न्यूनतम 15 हजार रुपये मासिक पारिश्रमिक सहित चार प्रमुख मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कोटवारों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की। कोटवारों का कहना है कि वर्षों से शासन और प्रशासन के महत्वपूर्ण कार्यों में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें पर्याप्त पारिश्रमिक और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

धरना-प्रदर्शन में शामिल कोटवारों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने, राजस्व संबंधी कार्यों में सहयोग करने और प्रशासनिक सूचनाओं के आदान-प्रदान सहित कई जिम्मेदारियां कोटवार निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। कोटवारों ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए उन्हें नियमित कर्मचारी के रूप में मान्यता देने की मांग की है।

कोटवारों ने ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से मांग की कि उन्हें नियमित करते हुए राजस्व विभाग में संविलियन किया जाए। उनका कहना है कि नियमितीकरण होने से उन्हें शासकीय कर्मचारियों की तरह बीमा, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि सेवानिवृत्ति और वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। वर्तमान व्यवस्था में पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलने से कोटवारों और उनके परिवारों को भविष्य की चिंता बनी रहती है।

प्रदर्शनकारी कोटवारों ने बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए मासिक पारिश्रमिक में वृद्धि की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोटवारों का पारिश्रमिक अलग-अलग वर्गों के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जबकि सभी कोटवारों से लगभग समान प्रकृति के कार्य कराए जाते हैं। ऐसे में पारिश्रमिक में वर्गवार अंतर रखना उचित नहीं है। कोटवारों ने सभी को एक समान वर्ग में शामिल करते हुए न्यूनतम 15 हजार रुपये प्रतिमाह पारिश्रमिक निर्धारित करने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा पारिश्रमिक में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है।

कोटवारों ने रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कुछ स्थानों पर नियुक्तियों में मनमानी की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने मांग की कि कोटवारों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए और परंपरागत व्यवस्था के अनुरूप कोटवार परिवार के पात्र सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए शासन स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता जताई गई, ताकि नियुक्तियों में किसी प्रकार की अनियमितता या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

इसके अलावा कोटवारों ने नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम क्षेत्रों में रिक्त पदों पर नियुक्ति से संबंधित प्रतिबंध हटाने की मांग की। उनका कहना है कि कई ग्रामीण क्षेत्र नगरीय निकायों की सीमा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे क्षेत्रों में कार्यरत कोटवार की मृत्यु, त्यागपत्र या सेवानिवृत्ति के बाद पद रिक्त होने पर नई नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। इससे कोटवार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने राज्य सरकार से नगरीय निकाय क्षेत्रों में रिक्त कोटवार पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की।

कोटवारों का कहना है कि वे ग्रामीण प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और लंबे समय से शासन के निर्देशों के अनुरूप अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति और सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनकी सेवाओं और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण, सम्मानजनक पारिश्रमिक तथा सामाजिक सुरक्षा से संबंधित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

धरना-प्रदर्शन के बाद कोटवारों ने मुख्यमंत्री साय के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए चारों प्रमुख मांगों के शीघ्र निराकरण का आग्रह किया। कोटवारों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उचित निर्णय करेगी, जिससे प्रदेशभर के कोटवारों को आर्थिक सुरक्षा और बेहतर सेवा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

हिन्दुस्थान समाचार/ लालिमा शुक्ला पुरोहित

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हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT

Livevns.news Desk
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