जिलास्तरीय कोटवार सम्मेलन में कोटवार हुए सम्मानित, मिली आवश्यक सामग्री

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जिलास्तरीय कोटवार सम्मेलन में कोटवार हुए सम्मानित, मिली आवश्यक सामग्री


कोटवाराें काे नक्सली मुखबिर बताकर करते थे प्रताड़ित, वर्दी पहनने से भी कतराते थे

सुकमा, 01 जुलाई (हि.स.)। बस्तर के सबसे संवेदनशील इलाकों में शुमार सुकमा जिला अब नक्सलवाद के काले साये से उबरकर विकास की एक नई इबारत लिख रहा है। जिला मुख्यालय के शबरी ऑडिटोरियम में आज बुधवार काे जिलास्तरीय कोटवार सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दाैरान बेहतर काम करने वाले उत्कृष्ट कोटवारों को मंच पर अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया।

उल्लेखनीय है कि एक दौर था जब नक्सलियों के खौफ और प्रताड़ना के कारण कोटवार अपनी वर्दी पहनने से भी कतराते थे और उन्हें मुखबिर बताकर प्रताड़ित किया जाता था। लेकिन अब वक्त बदल चुका है, शासन के बढ़ते प्रभाव के बीच नक्सलियों का डर पूरी तरह खत्म हो रहा है। इसी सुशासन को और मजबूत करने के लिए प्रशासन ने जिले के सभी कोटवारों के पदों को शत-प्रतिशत भर दिया है, ताकि अंदरूनी गांवों तक सूचना तंत्र की जड़ें और मजबूत की जा सकें।

जिलास्तरीय कोटवार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कलेक्टर अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि सुकमा जिला अब नक्सल प्रभाव से मुक्त होकर तेजी से मुख्यधारा में लौट रहा है। ऐसे में शासन और ग्रामीणों के बीच की सबसे अहम कड़ी यानी कोटवारों की जिम्मेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। गांवों के समग्र विकास और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के लिए कोटवारों को अपने कर्तव्यों का सजगता से निर्वहन करना होगा। वहीं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने सुरक्षा के मोर्चे पर बात रखते हुए कहा कि नक्सलवाद अब समाप्त हो चुका है, लेकिन कोटवारों को अभी भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखनी होगी। उन्होंने कोटवारों से कानून-व्यवस्था, घरेलू हिंसा की रोकथाम और अवैध गतिविधियों की सटीक सूचना समय पर पुलिस तक पहुंचाने की अपील की।

सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सुदूर अंचलों में सरकारी योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन में भी इन कोटवारों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने कोटवारों को उनके अधिकारों से अवगत कराते हुए बताया कि 1 जुलाई से मनरेगा सहित अन्य सभी ग्रामीण विकास योजनाओं को प्रभावी बनाने और सूचनाओं के प्रसार में इनकी मदद ली जाएगी। इसके साथ ही, सुकमा जिले के 65 प्रतिशत वनाच्छादित हिस्से की सुरक्षा का जिम्मा भी अब इनके कंधों पर होगा। वनमंडलाधिकारी अक्षय भोंसले ने जंगलों की अवैध कटाई, अतिक्रमण और वन्यजीवों के शिकार जैसे अपराधों को रोकने के लिए कोटवारों से वन विभाग के साथ मिलकर एक मजबूत सूचना नेटवर्क तैयार करने का आग्रह किया।

इस ऐतिहासिक सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कोटवारों को उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ प्रशासन, पुलिस और वन विभाग के बीच एक मजबूत तालमेल स्थापित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान बेहतर काम करने वाले उत्कृष्ट कोटवारों को मंच पर अधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस मौके पर नवनियुक्त कोटवारों को उनकी नई वर्दी सौंपी गई, साथ ही सभी उपस्थित कोटवारों को ड्यूटी के लिए जरूरी सामान जैसे हूटर, आधुनिक टॉर्च, बेल्ट, बैच, डंडा और थर्मस की विशेष किट प्रदान की गई। प्रशासन के इस संबल से सुकमा के कोटवार अब गर्व के साथ सुशासन और सुरक्षा की नई मशाल थामने को तैयार हैं। इस अवसर पर प्रभारी अपर कलेक्टर शबाब खान सहित अन्य जिलास्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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