बलरामपुर : केसीसी ऋण विवाद पर पांच दिन बाद थमा किसानों का आंदोलन, भूख हड़ताल समाप्त

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बलरामपुर : केसीसी ऋण विवाद पर पांच दिन बाद थमा किसानों का आंदोलन, भूख हड़ताल समाप्त


23 जून तक समाधान का भरोसा, किसानों ने कहा- मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर होगा बड़ा आंदोलन

बलरामपुर, 21 जून (हि.स.)। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण और धान खरीद की लंबित भुगतान राशि को लेकर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रामानुजगंज के सामने पिछले पांच दिनों से चल रहा किसानों का आंदोलन फिलहाल स्थगित हो गया है। प्रशासन की ओर से जल्द समाधान का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने धरना और क्रमिक भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा और अधिक व्यापक रूप में शुरू किया जाएगा।

किसान नेता नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान बैंक परिसर के बाहर आंदोलनरत थे। किसानों का आरोप था कि उनकी जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर केसीसी ऋण दर्ज कर दिया गया है। इसके चलते धान बिक्री से मिलने वाली उनकी राशि का भुगतान अटक गया है, जिससे कई किसान आर्थिक परेशानियों और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।

आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन किया। चौथे दिन आंदोलन ने नया मोड़ लेते हुए क्रमिक भूख हड़ताल का रूप ले लिया। पांच किसानों ने अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर प्रशासन का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। आंदोलन को किसान संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिलता रहा।

धरना स्थल पर पहुंचे किसान कांग्रेस के जिला महामंत्री अरविंद दुबे, कमाल अहमद, संतोष यादव, विकास दुबे और डॉ. दिनेश यादव सहित अन्य लोगों ने किसानों की मांगों का समर्थन किया और उनकी समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।

आंदोलन के दौरान किसानों ने कई गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना था कि जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें मृत व्यक्तियों तथा जेल में बंद लोगों के नाम पर भी ऋण दर्ज होने की जानकारी मिली है। किसानों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी किसानों से दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है तथा शिकायतों की जांच उच्च स्तर पर कराई जा रही है। मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों से भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी जांच जारी है।

आंदोलन के आज रविवार काे पांचवें दिन कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश पर एसडीएम आनंद नेताम धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से विस्तार से चर्चा की और प्रशासन की ओर से समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया। एसडीएम ने कहा कि 23 जून तक किसानों के हित में ठोस निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासन के आश्वासन के बाद एसडीएम आनंद नेताम ने आंदोलनरत किसानों को जूस पिलाकर क्रमिक भूख हड़ताल समाप्त कराई। इसके साथ ही पांच दिनों से जारी धरना भी समाप्त हो गया।

हालांकि किसान नेता नरेंद्र सिंह ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि केवल स्थगित किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।

पिछले पांच दिनों से यह आंदोलन पूरे जिले में चर्चा का विषय बना रहा। अब किसानों और आम लोगों की निगाहें 23 जून पर टिकी हैं, जब प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

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