कस्तूरबा विद्यालय के बच्चे उतरे सड़क पर, पुरानी अधीक्षिका की वापसी की मांग
बीजापुर, 07 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के भोपालपटनम स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के बच्चे बुधवार को अचानक सड़क पर उतर आए और पुरानी अधीक्षिका को वापस लाने की मांग को लेकर रैली निकाली। आश्रम शाला परिसर से शुरू हुई रैली पेट्रोल पंप तक पहुंची। बच्चे नारे लगाते हुए अपनी मांग को लेकर आगे बढ़े। अचानक बड़ी संख्या में बच्चों के सड़क पर पहुंचने की जानकारी मिलते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बच्चों को सलाह देकर वापस आश्रम परिसर लाया गया।
मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले इसी छात्रावास में बच्चों के साथ मार-पीट के आरोप सामने आए थे। शिकायत और घटना के बाद संबंधित अधीक्षिका को हटाने की कार्रवाई की गई थी। अब उसी अधीक्षिका को वापस लाने की मांग को लेकर बच्चों के सामूहिक रूप से सड़क पर उतरने से छात्रावास की व्यवस्था और बच्चों के साथ अधिकारियों के संवाद को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि बच्चों के मन में किसी प्रकार का भय, असुरक्षा या असंतोष था तो उनकी नियमित काउंसिलिंग और संवाद के माध्यम से समस्या को समझने की जरूरत थी। बच्चों से संवाद होता तो सड़क पर आने की जरूरत क्यों पड़ती?
बच्चों की नाराजगी सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल बच्चों का इस तरह सामूहिक रूप से सड़क पर उतरना सामान्य घटना नहीं है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि कार्रवाई के बाद बच्चों की स्थिति और उनकी भावनाओं को समझने के लिए विभाग की ओर से कितनी गंभीरता से प्रयास किए गए। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों को अपनी बात रखने के लिए सड़क का रास्ता क्यों चुनना पड़ा। अधिकारियों और छात्रावास प्रबंधन को समय-समय पर बच्चों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए थीं। उनकी शिकायतों और भावनाओं को समझकर समाधान का प्रयास किया जाता तो संभवतः स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।
बुधवार को बच्चों के सड़क पर उतरने की घटना ने विभागीय निगरानी और संवाद व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब शिक्षा एवं आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के सामने यह चुनौती है कि वे पूरे मामले की निष्पक्षता से पड़ताल करें, बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी वास्तविक समस्या समझें और छात्रावास में भयमुक्त एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि बच्चों को रैली निकालने की स्थिति क्यों बनी और उनकी मांगों पर विभाग की आगे की कार्रवाई क्या होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

