झीरम कांड के पीछे कथित राजनीतिक षडयंत्र की जांच नहीं हुई-भूपेश बघेल

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झीरम कांड के पीछे कथित राजनीतिक षडयंत्र की जांच नहीं हुई-भूपेश बघेल


रायपुर, 05 सितंबर (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा है कि, झीरम घाटी में रचा गया षडयंत्र लोकतंत्र के इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक नरसंहारों में से एक था। भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम कांड के पीछे कथित राजनीतिक षडयंत्र की जांच आज तक नहीं हुई है।

उन्होंने दावा किया कि एनआईए ने 39 लोगों को आरोपित बनाया था, लेकिन जांच में लगातार लापरवाही के चलते 10 से अधिक लोगों को पकड़ा नहीं जा सका। ऐसे मामले में निचले स्तर के सिर्फ 10 नक्सलियों को सजा मिलना न्याय नहीं कहा जा सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि नक्सलियों के शीर्ष नेताओं के नाम पहले ही एफआईआर से हटा दिए गए थे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि “पता नहीं किसके कहने पर” ऐसा किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम कांड के पीछे कथित राजनीतिक षडयंत्र की जांच आज तक नहीं हुई है। उन्होंने जांच आयोग और आपराधिक जांच के बीच अंतर बताते हुए कहा कि जांच आयोग ने केवल सुरक्षा व्यवस्था में कमी के पहलू की जांच की थी, जबकि उसका उद्देश्य आपराधिक मामले में दोषियों को सजा दिलाना नहीं था।भूपेश बघेल का कहना है कि दरभा थाने में दर्ज एफआईआर, लगाई गई धाराओं और उसमें उल्लेखित नामों के आधार पर एनआईए ने पर्याप्त पूछताछ नहीं की। बघेल के अनुसार, घटना के समय झीरम घाटी में मौजूद चश्मदीदों और गवाहों के बयान तक नहीं लिए गए। कांग्रेस पार्टी और बघेल का यह लगातार दावा रहा है कि यह हमला केवल माओवादी हिंसा नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र था, जिसकी गहराई से जांच नहीं की गई।

बघेल ने अपने बयान में 2020 में बलिदानी उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की शिकायत के बाद दर्ज हुई एफआईआर का जिक्र करते हुए कहा है कि इसके बाद एनआईए ने आपत्ति जताई और इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय गई। बघेल के अनुसार, नवंबर 2023 में उच्चतम न्यायालय ने एनआईए की आपत्ति खारिज कर दी थी।उन्होंने आरोप लगाया कि तब तक राज्य में भाजपा की सरकार वापस आ चुकी थी और इसके बाद ढाई साल बीत जाने के बावजूद इस एफआईआर पर कोई जांच नहीं की गई।

भूपेश बघेल ने 2013 में गठित जांच आयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घटना के बाद गठित आयोग को सुरक्षा में हुई कमी की जांच करनी थी, न कि आपराधिक मामले में सजा दिलाने के लिए जांच करनी थी।बघेल के मुताबिक, जस्टिस प्रशांत मिश्रा जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट पेश की थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने रिपोर्ट को अधूरा बताते हुए उसे पूरा करने के लिए जस्टिस मिन्नहाजुद्दीन और जस्टिस सतीश अग्रिहोत्री के नेतृत्व में नया जांच आयोग बनाया था।

भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम घाटी में हुए आपराधिक षडयंत्र की पूरी जांच के बिना इस मामले को न्याय की पूर्ण परिणति तक पहुंचा हुआ नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि “जब तक यह जांच नहीं होगी, तब तक झीरम का न्याय अधूरा रहेगा।”

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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