रंगों ने लिखी हौसले की कहानी, 90 प्रतिशत दिव्यांग बसंत साहू की कला को मिला सम्मान
धमतरी, 22 अगस्त (हि.स.)। कला केवल रंगों और रेखाओं का मेल नहीं, बल्कि संवेदनाओं, कल्पनाओं और अदम्य इच्छाशक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम भी है। धमतरी में आयोजित तीन दिवसीय ‘जीवन रंग’ चित्रकला प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता में इसी जज्बे की प्रेरक तस्वीर देखने को मिली।
बसंत फाउंडेशन छत्तीसगढ़, कुरूद के तत्वावधान में 21 से 23 अगस्त तक छत्रपति शिवाजी मराठा मंगल भवन में आयोजित प्रदर्शनी में कलाकार बसंत साहू की कलाकृतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनकी मेहनत, लगन और कला-साधना की जमकर सराहना हुई। 90 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले बसंत साहू ने अपनी कला को कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया है। उनकी पेंटिंग्स में रंगों के साथ कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण साफ दिखाई देता है।
प्रदर्शनी में पहुंचे स्कूली बच्चों ने पेंटिंग्स को करीब से देखा और रंगों के संयोजन, रेखांकन, आकृतियों के संतुलन तथा भावों को उकेरने की कला की बारीकियां जानीं। बच्चों ने बसंत साहू से सहज संवाद कर चित्रकला के उपयोगी गुर सीखे। उन्होंने बताया कि प्रभावशाली चित्र के लिए अच्छी ड्राइंग के साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और कल्पनाशीलता भी जरूरी है। बच्चों के लिए सबसे खास पल बसंत साहू के साथ बातचीत और तस्वीरें खिंचवाना रहा। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कला सीखने के लिए किसी विशेष परिस्थिति का इंतजार नहीं करना चाहिए। नियमित अभ्यास और अपनी कल्पना पर विश्वास से हर बच्चा अपनी अलग पहचान बना सकता है।
बसंत साहू की उपलब्धियां बच्चों के लिए प्रदर्शनी की सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार के साथ मुख्यमंत्री और राज्यपाल द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी कहानी ने संदेश दिया कि प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक सीमाएं भी बाधा नहीं बन सकतीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व विधायक कुरूद लेख राम साहू उपस्थित रहे। नगर पालिका कुरूद की अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, नगर पंचायत भखारा की अध्यक्ष ज्योति जैन, समाजसेवी सरिता दोषी, रीतु राज पवार, डिपेंद्र साहू, महेंद्र पंडित, चेतन हिंदुजा, मनोज साहू, राकेश साहू एवं कृष्णकांत साहू सहित धमतरी से पहुंचे वरिष्ठ नागरिक, कला-प्रेमी और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
लेख राम साहू ने कहा कि बसंत साहू की कलाकृतियां और कला के प्रति उनका समर्पण काबिल-ए-तारीफ है। 90 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत का परिणाम है। उनकी उपलब्धियां युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणादायी हैं। ‘जीवन रंग’ प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा को अवसर मिले तो वह सीमाओं से आगे निकलकर पहचान बना सकती है। आयोजन ने बच्चों और युवाओं में कला के प्रति रुचि जगाने के साथ आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संचार किया। बसंत साहू की कला और संघर्ष ने साबित कर दिया कि हौसले के रंगों से जीवन की हर चुनौती को खूबसूरत तस्वीर में बदला जा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

