जशपुर पुलिस को मिली अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन, अब घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच और त्वरित न्याय
जशपुर, 23 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ शासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को त्वरित एवं सटीक न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जशपुर जिले को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन आबंटित की गई है, जिसे 'लैब ऑन व्हील्स' का नाम दिया गया है।
रक्षित केंद्र जशपुर में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि जशपुर विधायक रायमुनी भगत, नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह और जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सिंह ने शनिवार काे हरी झंडी दिखाकर इस वैन को रवाना किया। इस अवसर पर एसडीएम विश्वास राव मस्के, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार सहित भारी संख्या में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और मीडियाकर्मी उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन रक्षित निरीक्षक अमरजीत खूंटे द्वारा किया गया, जबकि डीआईजी व एसएसपी ने सभी अतिथियों का स्वागत और आभार व्यक्त किया।
डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने इस ऐतिहासिक पहल की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में अपराध जांच प्रणाली को आधुनिक, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने के लिए स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) रायपुर द्वारा इस सेवा की शुरुआत की गई है। 1 जुलाई 2024 से देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 के तहत 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक टीम की उपस्थिति और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी कड़ी में जशपुर जिले को यह अत्याधुनिक वाहन प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत से तैयार ऐसी 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात की जा रही हैं, जो सीधे डायल-112 सेवा से भी जुड़ी रहेंगी ताकि घटनास्थल पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
इस 'लैब ऑन व्हील्स' के जरिए अब गंभीर मामलों में जांच टीम को फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। फॉरेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी श्री सलीम कुजूर ने बताया कि पहले साक्ष्यों को लैब भेजने में देरी के कारण उनके दूषित या नष्ट होने का खतरा रहता था, लेकिन अब मौके पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच संभव होगी। यह वैन फिंगरप्रिंट व फुटप्रिंट डिटेक्शन, डीएनए व ब्लड सैंपल कलेक्शन, नारकोटिक्स व रासायनिक पदार्थ परीक्षण, डिजिटल फॉरेंसिक, सीसीटीवी व मोबाइल डेटा विश्लेषण, बैलिस्टिक, गन शॉट रेसिड्यू (जीएसआर) जांच किट, हाई-इंटेंसिटी लाइट सोर्स, डीएसएलआर कैमरा, वीडियोग्राफी उपकरण और मिनी रेफ्रिजरेटर जैसी विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है। इससे साक्ष्यों की 'चेन ऑफ कस्टडी' को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखा जा सकेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जशपुर विधायक रायमुनी भगत ने केंद्र और राज्य सरकार की इस आधुनिकीकरण नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अक्सर हत्या, दुष्कर्म, और महिला व बाल अपराधों में साक्ष्य के अभाव के कारण अपराधी कानूनी कमियों का फायदा उठाकर बरी हो जाते थे, लेकिन अब इस वैज्ञानिक प्रणाली से वास्तविक अपराधियों की पहचान आसान होगी। उन्होंने एक बेहद लोक-कल्याणकारी विचार साझा करते हुए कहा, बेगुनाह पिसे नहीं, गुनहगार बचे नहीं। विधायक ने यह भी रेखांकित किया कि इस वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित जांच से उन बेगुनाह लोगों को भी संरक्षण मिलेगा जो कई बार झूठी शिकायतों के कारण परेशान होते थे।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने इसे सुशासन की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस परित्राणाय साधुनाम के अपने मूल मंत्र पर चलते हुए जनसुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और यह नई तकनीक पुलिस की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। वहीं, नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत और जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सिंह ने भी इस पहल को न्याय व्यवस्था को मजबूत, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर ही त्वरित साक्ष्य संग्रहण होने से अदालतों में पुलिस का पक्ष मजबूत होगा, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा होगा और अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सकेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

