जशपुर में हीटवेव को लेकर हाई अलर्ट, कलेक्टर ने विभागों को दिए पुख्ता इंतजाम के निर्देश
जशपुर, 24 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही जिला प्रशासन लू और तापघात (हीट स्ट्रोक) से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क हो गया है। मौसम विभाग की संभावित चेतावनियों को देखते हुए कलेक्टर रोहित व्यास ने जिले में प्रभावी कार्ययोजना लागू कर दी है। उन्होंने उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों और संवेदनशील आबादी की पहचान कर विशेष सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि सभी विभागों, संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों के आपसी समन्वय और सक्रिय भूमिका से ही लू के खतरों और इससे होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है। प्रशासन ने मौसम विभाग द्वारा जारी रंग संकेत प्रणाली (कलर कोड) को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि सामान्य से 6 डिग्री अधिक तापमान पर 'रेड अलर्ट', 4 से 5 डिग्री अधिक पर 'ऑरेंज अलर्ट' और निकटतम सामान्य से अधिक तापमान पर 'पीला अलर्ट' मानकर तुरंत बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे।
इसी मुस्तैदी के तहत मुख्य नगर पालिका एवं पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजारों और अस्पतालों जैसे भीड़-भाड़ वाले सभी सार्वजनिक स्थलों पर शीतल जल केंद्रों (प्याऊ और वाटर कूलर) की स्थापना सुनिश्चित करें। खुले में काम करने वाले श्रमिकों और राहगीरों के लिए छाया, ठंडे पानी और प्राथमिक चिकित्सा से युक्त अस्थायी विश्राम केंद्र बनाए जा रहे हैं। अत्यधिक गर्मी के समय, यानी दोपहर 12 से 4 बजे के बीच, कचरा संग्रहण और सफाई कर्मियों के काम के घंटों में बदलाव किया गया है ताकि वे सीधे धूप से बच सकें। वातावरण को ठंडा रखने के लिए प्रमुख बाजारों और व्यस्त सड़कों पर फायर ब्रिगेड तथा जल वितरण वाहनों के माध्यम से पानी का नियमित छिड़काव किया जाएगा। इसके साथ ही, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, लाउडस्पीकर और सोशल मीडिया के जरिए आम नागरिकों तक लू से बचाव के उपाय लगातार पहुँचाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य के मोर्चे पर जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक को अलर्ट पर रखा गया है। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, ग्लूकोज, ओआरएस पैकेट्स और कूलिंग ट्रीटमेंट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। आपातकालीन स्थिति के लिए जिला अस्पताल में एक विशेष 'इमर्जेंसी हीट स्ट्रोक यूनिट' स्थापित की गई है, जबकि सभी 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं को बर्फ के टुकड़ों, कोल्ड पैक और हाइड्रेशन सपोर्ट से सुसज्जित रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील वर्गों जैसे गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों, मधुमेह के मरीजों और कुपोषित बच्चों की विशेष निगरानी के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को लगाया गया है। निर्माण स्थलों, ईंट भट्ठों और बाजारों में पैरामैडिकल मोबाइल यूनिट्स (एमएमयू) तैनात की जा रही हैं, जो प्रभावित लोगों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दे सकेंगी।
श्रमिकों और कमजोर वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग तथा श्रम विभाग को विशेष निर्देश दिए गए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छ पेयजल और ओआरएस घोल की उपलब्धता अनिवार्य कर दी गई है। जिला श्रम पदाधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे सभी निर्माण स्थलों और फैक्ट्रियों में छायादार विश्राम स्थल सुनिश्चित करें। इसके साथ ही दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच भारी श्रम वाले बाहरी कार्यों को स्थगित या समायोजित करने की नीति लागू की जा रही है, और नियमों की अनदेखी रोकने के लिए विशेष निरीक्षण दल गठित किए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, पशुधन विकास विभाग ने भी मूक पशुओं के लिए पुख्ता प्रबंध किए हैं; डेयरी फार्मों और गौशालाओं में ठंडा पानी पहुँचाने, पशुओं को दोपहर में चराने से रोकने और उनके चारे में इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल करने के लिए पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है।
गर्मी के इस मौसम में आगजनी की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला अग्निशमन विभाग को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है। अस्पतालों, स्कूलों, पेट्रोल पंपों और गैस गोदामों जैसी संवेदनशील जगहों पर सघन 'फायर सेफ्टी ऑडिट' किया जा रहा है। वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों में लगने वाली आग पर भी नजर रखी जा रही है। इसके समानांतर, परिवहन विभाग ने बस, ऑटो और ट्रक चालकों के लिए टोल प्लाजा तथा हाईवे पर विशेष विश्राम केंद्र और स्वास्थ्य जाँच शिविर लगाने की व्यवस्था की है। जशपुर जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए इन चौतरफा कदमों और विभिन्न विभागों की चौबीसों घंटे मुस्तैदी से उम्मीद है कि जिले के नागरिक इस भीषण गर्मी में पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

