फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के सहारे सरकारी नौकरी पाने वाले 186 कर्मचारियों के खिलाफ होगी जांच

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फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के सहारे सरकारी नौकरी पाने वाले 186 कर्मचारियों के खिलाफ होगी जांच


रायपुर, 19 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के सहारे सरकारी नौकरी पाने वाले 186 कर्मचारियों के खिलाफ साय सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। रायपुर में आज समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग की एक संयुक्त बैठक में यह अहम फैसला लिया गया है कि इन सभी संदिग्ध मामलों की गहनता से भौतिक जांच कराई जाएगी।

समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक में ऐसे 186 व्यक्तियों से जुड़े प्रकरणों की मेडिकल जांच कराने पर चर्चा हुई।

मामलों की जांच राज्य मेडिकल बोर्ड या संभागीय मेडिकल बोर्ड के माध्यम से कराई जाएगी। साथ ही दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी कार्ड की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भी कई फैसलों पर विचार किया गया।

बैठक में तय किया गया कि दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा में कार्यरत 186 व्यक्तियों से जुड़े मामलों की जांच सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित लोगों को मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होकर परीक्षण कराने के निर्देश जारी किए जाएंगे। निर्धारित समय पर भौतिक जांच के लिए उपस्थित होने वाले लोगों के मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य मेडिकल बोर्ड और संभागीय मेडिकल बोर्ड में जांच की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।

बैठक में निर्णय लिया गया है कि सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वास्तविक दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड और परीक्षण शिविर (शिविरों) का आयोजन किया जाएगा। दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड जारी करने की पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बनाया जाएगा ताकि लोगों को भटकना न पड़े।बैठक में उभयलिंगी समुदाय के व्यक्तियों को बेहतर और गरिमापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए विशेष कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इसमें उनकी सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी और मेडिकल सपोर्ट के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति बनी। राज्य में संचालित नशामुक्ति केंद्रों की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत (सुदृढ़) किया जाएगा ताकि जरूरतमंदों का बेहतर पुनर्वास किया जा सके।

इस उच्चस्तरीय बैठक में मंत्रियों के साथ दोनों विभागों के शीर्ष अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हुए, जिन्होंने इन योजनाओं को धरातल पर उतारने का खाका तैयार किया। मेडिकल बोर्ड में विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात भी कही गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होने पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं लेने पर भी सहमति बनी।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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