प्रधानपाठक लीलाराम की नवाचारी पढ़ाई से बच्चों को मिली नई उड़ान

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प्रधानपाठक लीलाराम की नवाचारी पढ़ाई से बच्चों को मिली नई उड़ान


शिक्षक दिवस पर विशेष

धमतरी, 04 सितंबर (हि.स.)। सरकारी स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ नवोदय, एकलव्य और जवाहर उत्कर्ष जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचाने का सपना प्रधानपाठक लीलाराम साहू अपनी नवाचारी शिक्षण पद्धति से साकार कर रहे हैं। स्मार्ट टीवी के माध्यम से आधुनिक तरीके से पढ़ाई, गतिविधियों के जरिए सीखने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विशेष जोर ने बच्चों के भीतर सीखने की ललक और आत्मविश्वास को बढ़ाया है।

उनके पूर्व पदस्थ शासकीय प्राथमिक शाला मुड़पार में उनके प्रयासों का असर नामांकन में साफ दिखाई दिया, जहां दर्ज संख्या 28 से बढ़कर 125 तक पहुंच गई। खास बात यह रही कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने भी सरकारी स्कूल में प्रवेश लिया। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए लीलाराम साहू का चयन राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025-26 के लिए हुआ है। पांच सितंबर को राजभवन में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। बच्चों को विषयों को सरल और रोचक ढंग से समझाने के लिए लीलाराम ने विभिन्न शिक्षण सहायक सामग्री (टीएलएम) तैयार की। उनके द्वारा बनाया गया ‘कौन बनेगा होशियार’ टीएलएम जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रहा। इसे राज्योत्सव में प्रदर्शित किया गया और डीईओ के यू-ट्यूब चैनल पर भी स्थान मिला।

स्मार्ट टीवी के जरिए पाठ, कहानी और कविता को रोचक तरीके से समझाने के साथ बच्चों को नवोदय, एकलव्य और जवाहर उत्कर्ष परीक्षाओं की तैयारी भी कराई गई। उनके पूर्व और वर्तमान स्कूलों के 23 विद्यार्थी इन संस्थानों के लिए चयनित हो चुके हैं। लीलाराम ने बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय ‘करके सीखने’ पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को सीमेंट के गमले बनाना सिखाया, जिससे उनमें रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल विकसित हुआ। इस नवाचार के लिए उनका चयन राज्यस्तरीय ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ के ‘हमारे नायक’ कार्यक्रम में हुआ। उनके कार्यों को राज्य के चर्चापत्र और ‘शिक्षा के गोठ’ में भी स्थान मिला। हस्तपुस्तिका निर्माण के क्षेत्र में उनके स्कूल की एक छात्रा का राज्य स्तरीय ‘हमारे नायक’ कार्यक्रम में चयन हुआ।

जनसहभागिता से बदला स्कूल का माहौल:

लीलाराम ने पढ़ाई के साथ स्कूल की सुविधाओं और वातावरण को बेहतर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया। पूर्व पदस्थ शाला तरसीवां और उन्नत प्राथमिक शाला मुड़पार में स्टाफ व जनसहयोग से मैदान समतलीकरण, किचन गार्डन, छत मरम्मत, आहता जीर्णोद्धार, प्रिंट रिच वातावरण और स्मार्ट टीवी जैसी सुविधाएं विकसित कराई गईं। माता उन्मुखीकरण, बालसभा, शिक्षा मड़ई, पौधारोपण, स्वच्छता जागरूकता और पालक संपर्क जैसी गतिविधियों को नियमित रूप से बढ़ावा दिया गया। मुड़पार स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और सकारात्मक वातावरण का असर नामांकन पर पड़ा और दर्ज संख्या 28 से बढ़कर 125 हो गई। निजी स्कूलों के बच्चों ने भी यहां प्रवेश लिया। वर्तमान शाला धौराभाठा में भी जनसहभागिता से स्कूल विकास के कार्य लगातार जारी हैं। यहां अब तक 130 बार न्योता भोज कराया जा चुका है।

शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर:

प्रधानपाठक लीलाराम साहू का मानना है कि स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की नींव है। वे कहते हैं, “मेरा स्कूल ही मेरी पहचान है।” उनका प्रयास है कि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार, नवाचार और आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए। ऐसा वातावरण तैयार हो, जहां बच्चे रुचि के साथ सीखें, उनका आत्मविश्वास बढ़े और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों में पढ़ाई के साथ नैतिक मूल्यों, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की समझ विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। शिक्षा में नवाचार और समर्पण के लिए लीलाराम साहू को विभिन्न स्तरों पर सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। अब राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025-26 के लिए चयन उनके शैक्षणिक योगदान को एक और बड़ी पहचान प्रदान कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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