बस्तर में बाढ़ का असर : पानी उतरते ही खेतों में सड़ने लगी धान की फसल, किसानों ने मांगा सर्वे व राहत

WhatsApp Channel Join Now
बस्तर में बाढ़ का असर : पानी उतरते ही खेतों में सड़ने लगी धान की फसल, किसानों ने मांगा सर्वे व राहत


जगदलपुर, 29 सितंबर (हि.स.)। बस्तर विकासखंड के सोनारपाल, चपका, मधोता, खैरगुड़ा, भैंसगांव, बोदरा, टिकनपाल उसरी सहित लगभग सभी बाढ़ प्रभावित गांवों में किसानों की मुश्किलें बढ़ा गई है। कई जगह घरों में पानी घुसने से मकानों को नुकसान पहुंचा है। वहीं खेतों में लंबे समय तक पानी भरे रहने से खड़ी धान की फसल अब सडने लगी है। पानी उतरने के बाद खेतों में धान के पौधे जड़ से खराब होकर सूखते नजर आ रहे हैं।

किसानों के लिए यह नुकसान सिर्फ फसल तक सीमित नहीं है। धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवा, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च पर बड़ी रकम खर्च हुई है। कई किसानों ने खेती के लिए ऋण भी लिया है। ऐसे में खड़ी फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने लागत डूबने के साथ कर्ज चुकाने की चिंता भी बढ़ गई है। मकान और फसल दोनों को नुकसान पहुंचने से ग्रामीण परिवारों का आर्थिक संकट गहरा गया है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया है, लेकिन फसल नुकसान की सूचना देने और बीमा दावा करने की प्रक्रिया को लेकर वे असमंजस में हैं। वहीं जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं कराया है, वे प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर शासन से मिलने वाली राहत के प्रावधान जानना चाहते हैं।

किसानों की मांग है कि प्रशासन प्रभावित गांवों में पहुंचकर मकान और फसल क्षति का मौके पर सर्वे कराए और वास्तविक नुकसान दर्ज करे। बीमित किसानों को दावा प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी देने के साथ बिना बीमा वाले पात्र किसानों को भी सरकारी राहत के. प्रावधान बताए जाएं। किसानों का कहना है कि खेतों में फसल लगातार खराब हो रही है। ऐसे में नुकसान का सर्वे जल्द शुरू होना जरूरी है। समय पर सर्वे और राहत प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो बाढ़ की मार झेल रहे किसानों पर आर्थिक संकट और भारी पड़ सकता है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

Share this story