अम्बिकापुर : निजी अस्पतालों में पार्किंग व्यवस्था बेहाल, मुख्य सड़कों पर लग रहा लंबा जाम

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अम्बिकापुर : निजी अस्पतालों में पार्किंग व्यवस्था बेहाल, मुख्य सड़कों पर लग रहा लंबा जाम


अम्बिकापुर, 09 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर शहर में निजी अस्पतालों की मनमानी और प्रशासनिक उदासीनता आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। शहर के रसूखदार निजी अस्पतालों में सुव्यवस्थित पार्किंग न होना अब सिर्फ ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट में तब्दील हो गया है।

अस्पतालों के बाहर मुख्य सड़कों पर बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण रोजाना घंटों लग रहे लंबे जाम में न केवल आम राहगीर परेशान हो रहे हैं, बल्कि कई बार जिंदगी और मौत से जूझते गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस भी दम तोड़ती नजर आती हैं। विडंबना यह है कि इस पूरे अव्यवस्थित ढर्रे पर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर मढ़कर पल्ला झाड़ने में मसरूफ हैं।

इस पूरे संकट के पीछे नगर निगम के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निगम के अधिकारियों ने बिना किसी जमीनी और भौतिक सत्यापन के, दफ्तर में बैठकर ही कई निजी अस्पतालों को पार्किंग की 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' रेवड़ियों की तरह बांट दी। इसी कागजी एनओसी को ढाल बनाकर स्वास्थ्य विभाग ने भी आंखें मूंद लीं और अस्पतालों को संचालन का लाइसेंस थमा दिया। आज आलम यह है कि जिन अस्पतालों के पास मौके पर साइकिल खड़ी करने की जगह नहीं है, वे कागजों पर फुल-पार्किंग का दावा ठोक रहे हैं। आश्चर्य की बात है कि यह खेल लंबे समय से जारी है, लेकिन न तो अब तक किसी दोषी अस्पताल की एनओसी रद्द की गई और ना ही फर्जीवाड़ा करने वाले अफसरों पर कोई गाज गिरी है।

मामले के तूल पकड़ने और चौतरफा घिरने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में थोड़ी सुगबुगाहट देखी जा रही है। इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अम्बिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है। महापौर का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बिना मौके के निरीक्षण और पार्किंग व्यवस्था के एनओसी जारी की गई है, तो न केवल संबंधित निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि इसमें संलिप्त दोषी अधिकारियों को भी बख्शा नहीं जाएगा। बहरहाल, अब देखना यह होगा कि यह आश्वासन महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाता है या सचमुच शहर की सड़कों को इस एम्बुलेंस-रोधी जाम से मुक्ति मिलती है।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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