जबरन नसबंदी का शिकार आत्मसमर्पित नक्सलियाें की सर्जरी करने वाले डाॅक्टराें काे किया गया सम्मानित

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जबरन नसबंदी का शिकार आत्मसमर्पित नक्सलियाें की सर्जरी करने वाले डाॅक्टराें काे किया गया सम्मानित


जगदलपुर, 15 जून (हि.स.)। बस्तर संभाग में मुख्यधारा में लौट रहे पुनर्वासित (आत्मसमर्पित नक्सली) लाभार्थियों को एक सामान्य और खुशहाल पारिवारिक जीवन प्रदान करने की दिशा में बस्तर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा मानवीय पहल की गई है।आईजी बस्तर और महारानी अस्पताल प्रबंधन द्वारा आए हुए सभी विशेषज्ञ सर्जनों को बस्तर की अनूठी कला और संस्कृति से जुड़े विशेष स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

दीर्घकालिक हिंसा से पीड़ित और सक्रिय रहने के दौरान जिन पुरुषों को संगठन के दबाव में जबरन नसबंदी का शिकार होना पड़ा था। उन्हें पुनः संतान सुख का अधिकार दिलाने के लिए जगदलपुर के महारानी अस्पताल में साेमवार काे एक विशेष निशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी/रीकैनालाइजेशन सर्जिकल कैंप का आयोजन किया गया।

यह अनूठा चिकित्सा शिविर बस्तर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग (बस्तर संभाग) के संयुक्त तत्वावधान तथा यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (वेस्ट जोन) के देश के शीर्ष विशेषज्ञ सर्जनों के तकनीकी सहयोग से सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। कर्मचारियों का सम्मान महारानी अस्पताल प्रबंधन द्वारा शिविर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले और योगदान देने वाले सभी जमीनी कार्यकर्ताओं व स्टाफ को इस ऐतिहासिक कैंप की स्मृति में मोमेंटो प्रदान किया गया।

शिविर के दौरान यूरोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुकरेजा ने इस पूरी मुहिम के चरणों और सफलताओं के महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि सफलता के दो चरण है, इस मानवीय मिशन के प्रथम चरण में कुल 33 सफल और सुरक्षित सर्जरीज की गई थीं। वहीं, वर्तमान में आयोजित इस द्वितीय चरण में 40 और सफल सर्जरीज को सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया जा चुका है।

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने इस मानवीय प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि, यह प्रयास बस्तर में नया नहीं है। इससे पहले भी किए गए ऐसे सर्जिकल प्रयासों के सफल परिणाम आए हैं और कई आत्मसमर्पित परिवारों के घरों में नन्ही किलकारियां गूंज चुकी हैं, जिससे उन्हें अपना परिवार आगे बढ़ाने का सौभाग्य मिला है। इसके साथ ही आईजी ने बस्तर संभाग की ओर से सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों और सहायक स्टाफ का आभार व्यक्त किया और मेहमान डॉक्टरों को बस्तर की समृद्ध पर्यटन विरासत से भी संक्षेप में अवगत कराया।

बस्तर जिले के एसपी शलभ सिन्हा ने इस कैंप की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए एक बेहद भावुक करने वाली सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक आत्मसमर्पित नक्सली, जिसकी पहले रिवर्स वासेक्टॉमी की गई थी, वह वर्तमान में एक बच्ची का पिता बना है, यह इस मुहिम की सबसे बड़ी सफलता है।

कार्यक्रम के अंत में सीएचएमओ डॉ. संजय बसाक और सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने इस पुनीत कार्य में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सभी प्रशासनिक अधिकारियों, देश के कोने-कोने से आए मेहमान डॉक्टरों, स्थानीय पैरामेडिकल स्टाॅफ और पुलिस विभाग का धन्यवाद ज्ञापित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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