हरा सोना का संग्रहण शुरू, जंगलों में बढ़ी रौनक

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हरा सोना का संग्रहण शुरू, जंगलों में बढ़ी रौनक


धमतरी, 03 मई (हि.स.)। जिले के वनों में ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ता की तोड़ाई और संग्रहण कार्य 1 मई से शुरू हो गया है। तेंदूपत्ता सीजन की शुरुआत के साथ ही जंगलों और संग्रहण केंद्रों (फड़ों) में रौनक लौट आई है। जिले की 27 वनोपज समितियों के अंतर्गत कुल 27,872 संग्राहक इस कार्य में सक्रिय हो गए हैं।

तेंदूपत्ता तोड़कर गड्डी बनाकर संग्रहण केंद्रों में बेचने का सिलसिला शुरू हो चुका है, जो 25 मई तक चलेगा। इस वर्ष जिले के लिए 28,800 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है। एक मानक बोरा में 1,000 गड्डी शामिल होती है। लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वन विभाग और समितियों ने व्यापक तैयारी की है।

मालूम हो कि वर्ष 2025 में जिले में 25,275 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया था, जो निर्धारित लक्ष्य का 94.31 प्रतिशत रहा। पिछले 3-4 वर्षों से लक्ष्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अनुकूल मानी जा रही हैं। पिछले वर्ष तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े संग्राहकों को 13 करोड़ 90 लाख 15 हजार 83 रुपये का भुगतान किया गया था। वहीं शासन को 20 करोड़ 2 लाख 72 हजार 754 रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। तेंदूपत्ता खरीद के लिए छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के फर्मों को टेंडर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार तेंदूपत्ता संग्रहण में कुछ समितियां गुणवत्ता के कारण खास पहचान रखती हैं। जबर्रा और दुगली क्षेत्र के तेंदूपत्ते को बेहतर गुणवत्ता का माना जाता है, जिसके चलते ठेकेदार इन क्षेत्रों के पत्तों की खरीदी में अधिक रुचि दिखाते हैं। सिहावा अंचल में नक्सल प्रभाव समाप्त होने से इस बार संग्रहण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। ठेकेदारों को लेवी जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी, वहीं संग्राहक भी सुरक्षित माहौल में काम कर सकेंगे। इससे लक्ष्य पूरा होने की संभावना बढ़ गई है।

जिले की प्रमुख समितियों में बोराई, तुमड़ीबहार, निर्राबड़ा, अमाली, नगरी, रतावा, सेमरा, बेलरगांव, घोटगांव, गट्टासिली, दुगली, राजपुर, जबर्रा, मारागांव, सिंगपुर, गेदरा, मोंगरागहन, बरबांधा, चनागांव, डोकाल, बिरझुली, खड़मा, पठार, मोंहदी (अ), मोंहदी (ब), छुही और अछोटा शामिल हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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