दुगली के बूटीगढ़ में पारंपरिक वन औषधि ज्ञान को समझने अमेरिका से पहुंचे अतिथि
धमतरी, 31 अक्टूबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां अब विदेशी चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। प्रदेश के वनांचल क्षेत्रों में पीढ़ियों से संरक्षित औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक उपचार पद्धतियों को करीब से समझने के उद्देश्य से अमेरिका से दो अतिथि छत्तीसगढ़ पहुंचे।
आगोरा इकोटूरिज्म द्वारा आयोजित विशेष ज्ञान आधारित यात्रा के दौरान उन्होंने बस्तर, धमतरी और कबीरधाम जिले के आदिवासी समुदायों के साथ समय बिताकर उनके पारंपरिक उपचार ज्ञान और वनस्पतियों के उपयोग की जानकारी प्राप्त की। आगोरा इकोटूरिज्म के संस्थापक डॉ. आलोक कुमार साहू के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा में अतिथियों ने बस्तर के धुरवा समुदाय, धमतरी जिले के दुगली क्षेत्र के पारंपरिक वैद्यों और कबीरधाम के बैगा समुदाय की उपचार परंपराओं को समझा। दुगली क्षेत्र में डॉ. आशीष कुमार साहू एवं डॉ. खिलेश्वर कुमार साहू ने स्थानीय पारंपरिक वैद्यों से अतिथियों का परिचय कराया।
इस दौरान औषधीय पौधों की पहचान, उनके पारंपरिक उपयोग, स्थानीय उपचार पद्धतियों तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित हो रहे वन औषधि ज्ञान पर विस्तार से चर्चा हुई। आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ को हर्बल स्टेट के रूप में पहचान मिली है। दुगली जैसे वनांचल क्षेत्रों में सदियों से अनेक महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियां मौजूद हैं, जिनका उपयोग स्थानीय वैद्य पारंपरिक उपचार में करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों के पास प्रकृति से जुड़ा बहुमूल्य पारंपरिक ज्ञान है, जिसे संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। इस यात्रा के माध्यम से विदेशी अतिथियों को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक चिकित्सा विरासत और वन औषधियों की उपयोगिता को करीब से जानने का अवसर मिला।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

