मातृ भूमि और मातृ भाषा के लिए प्रत्येक व्यक्ति के हदय में विशेष भाव होना चाहिए : राज्यपाल

मातृ भूमि और मातृ भाषा के लिए प्रत्येक व्यक्ति के हदय में विशेष भाव होना चाहिए : राज्यपाल
मातृ भूमि और मातृ भाषा के लिए प्रत्येक व्यक्ति के हदय में विशेष भाव होना चाहिए : राज्यपाल


मातृ भूमि और मातृ भाषा के लिए प्रत्येक व्यक्ति के हदय में विशेष भाव होना चाहिए : राज्यपाल


रायपुर , 2 अप्रैल (हि.स.)। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन सोमवार की देर शाम प्रो. जे. एन पाण्डेय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैदान रायपुर में आयोजित ‘उत्कल दिवस‘ समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर राज्यपाल हरिचंदन ने कहा कि वर्ष 1936 में ओड़िशा को एक स्वतंत्र प्रदेश के रूप में मान्यता मिली थी। ओड़िशा का इतिहास और यहां की वीरगाथा पूरी दुनिया में अनूठी है। ओड़िशा की भाषा, संस्कृति और कला को आगे बढ़ाने के लिए अनेक विभूतियों ने अपना योगदान दिया है। मधुसूदन दास, पंडित गोपबंधुदास, नीलकंठ दास, फकीर मोहन सेनापति जैसे विभूतियों के योगदान को आज भी ओडिशा और भारत याद करता है।

राज्यपाल ने भाषा के आधार पर ओडिशा राज्य के गठन में योगदान देने वाले मधुसूदन दास का विशेष उल्लेख किया। राज्यपाल ने कहा कि मातृ भूमि और मातृ भाषा के लिए प्रत्येक व्यक्ति के हदय में विशेष भाव होना चाहिए।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न समाज के लोगों को राज्यपाल ने सम्मानित किया। इसके पूर्व राज्यपाल हरिचंदन ने ओड़िशा के प्रसिद्ध समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और ओड़िशा राज्य के गठन में सक्रिय योगदान देने वाले विभूति मधुसूदन दास की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरूण साव, सांसद सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू एवं उत्कल समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार/ गेवेन्द्र

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