धमतरी में गणगौर की धूम: पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की शोभायात्रा
16वें दिन हुआ विधिवत समापन
धमतरी, 22 मार्च (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के धमतरी शहर में आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब 16 दिवसीय गणगौर पर्व रविवार को हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। पूरे 15 दिनों तक घर-घर में माता गौरी और ईशर (भगवान शिव) की स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई, वहीं 16वें दिन बाजे-गाजे और पारंपरिक उत्साह के साथ गणगौर की विदाई दी गई।
शहर के बाबा रामदेव मंदिर से गणगौर की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधानों में सजी महिलाएं जब ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरकते हुए आगे बढ़ीं, तो पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवमय हो उठा। शोभायात्रा बाबा रामदेव मंदिर, इतवारी बाजार से प्रारंभ होकर तहसील कार्यालय, कचहरी चौक, सदर बाजार, नूरानी चौक, भगत चौक, कोष्टापारा और नंदी चौक होते हुए कठोली तालाब पहुंची। कठोली तालाब में भगवान शिव-पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ गणगौर पर्व का समापन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और सुख-समृद्धि की कामना की।
स्वर्णकार समाज की सरला सोनी, प्रमिला सोनी ने बताया कि गणगौर पर्व होली के दूसरे दिन से शुरू होकर 16 दिनों तक चलता है। पहले दिन पांडोली बनाकर गणगौर माता की स्थापना की जाती है और पूरे 15 दिनों तक घर-घर जाकर पूजा, हल्दी-मेहंदी, गीत-संगीत और विभिन्न पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं। 16वें दिन ईशर गणगौर को लेने आते हैं, जिसके बाद माता की विदाई दी जाती है। शीतल सेठ ने बताया कि ‘गणगौर’ दो शब्दों से मिलकर बना है_‘गण’ अर्थात भगवान शिव और ‘गौर’ अर्थात माता पार्वती। यह पर्व विशेष रूप से मारवाड़ी समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कुंवारी युवतियां मनचाहा वर पाने और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत एवं पूजा करती हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

