मुफ्त राशन की व्यवस्था में बस्तर के बकावंड ब्लॉक में सबसे ज्यादा 5798 संदिग्ध मिले
जगदलपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। बस्तर जिले में गरीबों को मिलने वाले सस्ते और मुफ्त राशन की व्यवस्था में केंद्र सरकार द्वारा लगभग 13 हजार संदिग्ध लोगों के लाभ लेने का मामला डेटा की डिजिटल जांच में मिले हैं। इनमें आधार संबंधी विसंगतियां, डुप्लीकेट नाम, आयकरदाता, ईपीएफओ से जुड़े नौकरी पेशा लोग और सरकारी कर्मचारियों के रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
ब्लॉकवार आंकड़ों में बकावंड 5,798 संदिग्ध रिकॉर्ड के साथ सबसे ऊपर है। जगदलपुर ग्रामीण में 3,295, बस्तर ब्लॉक में 2,699, बास्तानार में 956 और बस्तर शहरी क्षेत्र में 217 रिकॉर्ड मिले हैं। इन आंकड़ों के आधार पर मैदानी स्तर पर सत्यापन करना प्रशामन के सामने बड़ी चुनौती होगी। जांच के दौरान राशन कार्ड में दर्ज परिवार के सदस्यों, आधार विवरण, आय संबंधी दस्तावेजों और नौकरी की जानकारी का मिलान करना होगा।
जांच में सामने आए इन आंकड़ों ने सवाल खड़ा किया है, कि पात्रता की शर्तों के बावजूद ऐसे नाम राशन कार्डों की सूची में कैसे शामिल हुए। क्या इनके जरिए सरकारी राशन का अनुचित लाभ लिया जा रहा था। डेटा मिलान में मिली विसंगतियों के बाद अब प्रशासन इन सभी मामलों का ब्लॉकवार सत्यापन करवा रहा है। यह काम जल्द से जल्द पूरा हो, इसके लिए पंचायतों और नगरीय निकायों को जिम्मेदारी दी गई है।
खाद्य नियंत्रक घनश्याम सिंह राठौर ने शुक्रवार काे बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जितने संदिग्धों की पहचान की गई थी, उनकी जांच की जा रही है। पहले चरण की जांच में अब तक लगभग 13 हजार लोग मिले हैं।
आने वाले दिनों में निकायों द्वारा दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने लोग वास्तव में अपात्र हैं। कितने मामलों में गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवाने की आशंका है। कितने रिकॉर्ड तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियों के कारण संदिग्ध बने हैं। सूची में नाम आने मात्र से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। बड़ी संख्या में संदिग्ध रिकॉर्ड मिलने से राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी पर सवाल जरूर उठे हैं। हालांकि, डेटा में विसंगति मिलना अपने आप में धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं है। पुराने रिकॉर्ड, गलत प्रविष्टि या डेटाबेस अपडेट न होने से भी गड़बड़ी सामने आ सकती है। इसलिए अंतिम कार्रवाई से पहले दस्तावेजों, परिवार की वास्तविक स्थिति और लागू पात्रता नियमों का सत्यापन जरूरी है।
फूड इंस्पेक्टर पायल वर्मा के अनुसार आधार, आयकर, ईपीएफओ, सरकारी सेवा और राशन कार्ड के रिकॉर्ड का डिजिटल मिलान करने से दोहरे नाम, आय संबंधी विसंगतियां और संदिग्ध पात्रता वाले मामले सामने आ सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक रिकॉर्ड में दर्ज है, या उसकी आय संबंधी जानकारी और राशन कार्ड के विवरण में अंतर है, तो सिस्टम ऐसे मामले को जांच के लिए चिह्नित कर सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

