बस्तर में कम हाेने लगा बाढ़ का पानी, बाढ प्रभाावित इलाकों में जल प्रलय की तस्वीर

WhatsApp Channel Join Now
बस्तर में कम हाेने लगा बाढ़ का पानी, बाढ प्रभाावित इलाकों में जल प्रलय की तस्वीर


जगदलपुर, 27 सितंबर (हि.स.)। बस्तर संभाग में बंगाल की खाड़ी में बने दबाव के कारण हुई मूसलाधार बारिश ने शहरी सहित ग्रामीण इलाकों में जल प्रलय जैसी स्थिति पैदा कर दी है। आज रविवार काे राहत की खबर है कि दाेपहर के बाद बाढ़ का पानी कम हाेने लगा है। बाढ का पानी उतरने के बाद फसल के नुकसान की स्थिति का आंकलन हाेगा।

बाढ़ ग्रस्त इलाकाें के ड्रोन की तस्वीर से इस जल प्रलय की तबाही का आंकलन किया जा सकता है। जल संसाधन विभाग इंद्रावती परियोजना के अधीक्षण यंत्री वीपी पांडे ने बताया कि आगे बारिश नहीं हुई तो बाढ़ का पानी पूरी तरह से उतरने में एक दिन से अधिक का समय लगेगा।

इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान (8.30 मीटर) को पार कर 12 मीटर से अधिक पहुंच गया था । जगदलपुर शहर की निचली बस्तियों प्रवीर वार्ड, डोंगाघाट, पनारापारा और आसना क्षेत्र में बाढ़ का पानी घरों के अंदर घुस गया है। नदी किनारे कई कच्चे मकान धराशायी हो गए हैं और सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं। ग्रामीण अंचलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। तोकापाल, नगरनार, भेजापदर और घाट धनोरा जैसे 300 से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरकर टापू बन चुके हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (रायपुर-कोटा) और राष्ट्रीय राजमार्ग-63 (जगदलपुर-बीजापुर) पर पुल-पुलियों के ऊपर पानी बहने से आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। केके (किरंदुल-कोत्तावालसा) रेल लाइन पर जगह-जगह लैंडस्लाइड होने से ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, वहीं जगदलपुर से हवाई उड़ानें भी स्थगित रहीं।

बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें 24 घंटे मुस्तैद रही। डोंगाघाट और अन्य बेहद संवेदनशील जलमग्न इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सेना के हेलीकॉप्टर और मोटरबोट्स की मदद लेनी पड़ी। जगदलपुर और आसपास के जिलों में 40 से अधिक राहत शिविर बनाए गए हैं। इनमें 6,000 से ज्यादा बाढ़ प्रभावित लोगों को ठहराया गया है, जहां उनके लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, और दवाओं का निःशुल्क प्रबंध किया गया है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे उफान मारते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

Share this story