डुबान की लाइफलाइन ढही, 10 से अधिक गांवों का संपर्क टूटा
धमतरी, 27 सितंबर (हि.स.)। जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते कोड़ेगांव और मोंगरागहन के बीच वर्षों पुराना जर्जर पुल ढह गया। इससे डुबान क्षेत्र के 10 से अधिक गांवों का प्रमुख आवागमन मार्ग बाधित हो गया है। ग्रामीणों को अब धमतरी आने-जाने के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, बाजार और जरूरी शासकीय कार्यों के लिए आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
पूर्व में भी पुल की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया था। पुल की स्थिति को देखते हुए समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं होने पर इसके टूटने की आशंका जताई गई थी। कुछ ही समय बाद पुल ढहने से ग्रामीणों के सामने वही स्थिति आ गई। ग्रामीणों ने बताया कि पुल लंबे समय से जर्जर था। इसके पुनर्निर्माण को लेकर कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिए गए। सुशासन तिहार के दौरान भी ग्रामीणों ने धमतरी कलेक्टर को मौके पर रोककर पुल की समस्या से अवगत कराया था। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते पुल के लिए ठोस कदम उठाए जाते तो वर्तमान स्थिति से बचा जा सकता था। गंगरेल बांध के डुबान क्षेत्र के गांवों के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है। कोड़ेगांव, मोंगरागहन सहित आसपास के ग्रामीण कांकेर जिले के चारामा मार्ग से होकर धमतरी पहुंचते हैं।
सरपंच जितेंद्र सिन्हा, पंच पवन कुमार जैन, खिलेश पटेल, मानसिंग शोरी, सुरेश पटेल सहित ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण लगातार पुल के पुनर्निर्माण की मांग करते रहे, लेकिन अब पुल ढह चुका है। ग्रामीणों ने तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने के साथ नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। पुल ढहने के बाद इस मार्ग से आवाजाही प्रभावित हो गई है। अब ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों से होकर जाना पड़ेगा, जिससे दूरी और यात्रा का समय बढ़ेगा।पुल टूटने का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ेगा। उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने, बाजार आने और शासकीय कामों के लिए धमतरी जाने वाले ग्रामीणों को परेशानी होगी। बारिश के दौरान वैकल्पिक मार्गों की स्थिति खराब होने पर समस्या और बढ़ सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

