विधर्मी हो चुकी जीवित पुत्री का, पिता ने किया पिंडदान

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विधर्मी हो चुकी जीवित पुत्री का, पिता ने किया पिंडदान


जगदलपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। बस्तर जिला मुख्यालय के धरमपुरा क्रमांक 3 निवासी सुजान दत्ता पिता जितेंद्र दत्ता ने उनकी जीवित पुत्री सिमरन दत्ता का शास्त्रीय विधि विधान से पिंडदान कर दिया । दरअसल वे अपनी पुत्री के विधर्मी युवक से विवाह करने को लेकर नाराज है। उन्होंने जीते जी पुत्री का आजीवन परित्याग कर देने की सार्वजनिक घोषणा पत्र भी जारी की है। निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति समाज बस्तर संभाग एवं बंगाली समाज ने उनके इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा और अपनी धर्म और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता बनी रहेगी।

दरअसल कुछ दिनों पूर्व उनकी पुत्री सिमरन दत्ता ने मुस्लिम युवक के बहकावे में आकर उससे विवाह कर धर्म परिवर्तन कर लिया है । तमाम समझाने के बावजूद युवती ने अपने परिवार व समाज वालों के उम्मीद पर पानी फेर दिया। यह भी कहा गया है कि यह मामला लव जिहाद से जुड़ा हुआ है। सिमरन के इस कदम से बुरी तरह आहत परिवार ने 20 सितंबर को धार्मिक व सामाजिक परंपरा के अनुसार उसका पिंडदान कर आजीवन संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी है। अपने निवास में सुजोन दत्ता ने अपना सिर मुंडवा कर पंडितों के मंत्रोच्चार के साथ पिंडदान किया, वहीं पश्चाताप भी किया। उन्होंने इस संबंध में पुत्री से परिवार के आजीवंत संबंध विच्छेद संबंधी घोषणा भी सार्वजनिक की है।

पिंडदान के अवसर पर रविवार को निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष जीवानंद हालदार सहित अन्य पदाधिकारी परिवार के बीच पहुंचकर सांत्वना दी। साथ ही इस कदम के लिए परिवार की सराहना भी की । समाज का कहना है कि मौजूदा समय में चल रहे लव जिहाद जैसे घातक षड्यंत्र से समाज की बहन बेटियों को बचाना आवश्यक है। ऐसे में किसी पिता द्वारा अपने कलेजे में पत्थर रखकर पुत्री का परित्याग कर देना समाज के लिए सकारात्मक संदेश देता है। समाज ने यह भी संदेश दिया है कि अपनी जीवन शैली परंपरा व संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहने सभी समाज सदस्यों को अपने बच्चों को संस्कार दिए जाने की आवश्यकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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