खाद संकट और कालाबाजारी के खिलाफ किसानों ने किया कलेक्ट्रेट घेराव

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खाद संकट और कालाबाजारी के खिलाफ किसानों ने किया कलेक्ट्रेट घेराव


-आठ सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

धमतरी, 15 जून (हि.स.)। खरीफ सीजन के बीच खाद की कमी और कालाबाजारी को लेकर किसानों का आक्रोश सोमवार को सड़कों पर दिखाई दिया। छत्तीसगढ़ किसान यूनियन जिला इकाई के बैनर तले बड़ी संख्या में किसानों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और प्रशासन को आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। आंदोलन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष घनाराम साहू ने किया। किसान आंदोलन में अलग-अलग जिलों से किसान शामिल हुए।

किसानों ने आरोप लगाया कि खेती के महत्वपूर्ण समय में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध नहीं हो रहा है, जबकि बाजार में खाद की कालाबाजारी खुलेआम जारी है। उन्होंने प्रत्येक एकड़ के लिए दो बोरी यूरिया और दो बोरी डीएपी उपलब्ध कराने, खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाने तथा किसानों पर नैनो डीएपी और नैनो यूरिया की अनिवार्य खरीद का दबाव बंद करने की मांग की।

किसानों ने पूर्व सरकार की तर्ज पर गोबर एवं जैविक कंपोस्ट खाद योजना को पुनः शुरू करने की भी मांग उठाई। आंदोलन के दौरान किसानों ने धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3358 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने, बढ़े हुए बिजली बिलों में राहत देने, स्मार्ट मीटर हटाने, पूर्व सरकार की धान खरीदी की लंबित चौथी किश्त का भुगतान करने तथा पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में कमी लाने की मांग भी प्रमुखता से रखी।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आंदोलन के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे किसानों ने एकजुट होकर सरकार और प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं तथा कृषि क्षेत्र को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

उर्वरकों की कृत्रिम कमी पैदा की जा रही:तेजराम विद्रोही

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि उर्वरकों की कृत्रिम कमी पैदा कर किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण खाद की कमी है, तो थोक विक्रेताओं के गोदामों में बड़ी मात्रा में उर्वरक कैसे उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि 266 रुपये की यूरिया 500 से 1000 रुपये तक और 1350 रुपये की डीएपी 2000 से 2500 रुपये प्रति बोरी तक बेची जा रही है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। साथ ही पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने आम जनता और किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर किया है।

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिलाध्यक्ष मदनलाल ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को राहत देने के बजाय उन पर नई-नई पाबंदियां लगाई जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज उपलब्ध कराया जाए तथा खाद वितरण पर लागू सीमाओं को तत्काल समाप्त किया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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