धान कटाई के बाद पैरा ले जा रहे किसान, मवेशियों के चारे की बढ़ी मांग

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धान कटाई के बाद पैरा ले जा रहे किसान, मवेशियों के चारे की बढ़ी मांग


धमतरी, 3 दिसंबर (हि.स.)। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों धान कटाई का काम तेजी से चल रहा है। फसल कटाई के साथ ही किसान मवेशियों के लिए पैरा (पराली) इकट्ठा करने में जुट गए हैं। गांवों में आज भी अधिकतर घरों में गाय-बैल रखे जाते हैं, जिसके लिए चारे की नियमित आवश्यकता बनी रहती है। खेतों से बैलगाड़ी में पैरा लाते किसानों की तस्वीरें गांवों की रोजमर्रा की गतिविधियों का हिस्सा बन गई हैं।

स्थानीय किसान रामकुमार साहू और जोहत साहू ने बताया कि, मवेशियों के लिए पैरा जरूरी होता है, लेकिन आजकल अधिकांश किसान हार्वेस्टर से धान कटवा रहे हैं। हार्वेस्टर से कटाई होने पर पैरा जमीन पर बिखरा रह जाता है या बहुत कम मात्रा में मिलता है, जिससे चारा संकट की स्थिति बन जाती है। केवल सीमित किसान ही मजदूरों से परंपरागत तरीके से फसल कटवा रहे हैं, जिससे पैरा की उपलब्धता बेहतर रहती है। कुछ वर्ष पहले जिला प्रशासन ने किसानों से पराली दान करने की अपील की थी, जिसके बाद बड़ी मात्रा में पराली गोठानों में पहुंचने लगी थी। इससे गोठानों में मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध हो रहा था। लेकिन प्रशासन द्वारा बाद में सख्ती कम किए जाने के कारण अब खेतों में ही हार्वेस्टर व थ्रेसर से कटा पैरा पड़ा रह जाता है और बड़ी मात्रा में गोठानों तक पैरा पहुंच ही नहीं पा रहा है। इधर, कुछ किसान खेत दोबारा तैयार करने के लिए पराली को जला भी रहे हैं, जो पर्यावरण और भूमि स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि पराली प्रबंधन के बेहतर विकल्प अपनाएं, जिससे खेत की उर्वरता भी बनी रहे और वायु प्रदूषण से भी बचा जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते चारे की मांग और पैरा प्रबंधन की चुनौती एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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