कोयला खदान में घुसा अकेला दंतैल हाथी, रातभर मची अफरा-तफरी; वन विभाग ने जंगल में खदेड़ा

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कोयला खदान में घुसा अकेला दंतैल हाथी, रातभर मची अफरा-तफरी; वन विभाग ने जंगल में खदेड़ा


अंबिकापुर, 30 अगस्त (हि.स.)। सरगुजा संभाग में हाथियों की आवाजाही के बीच शनिवार रात एक दंतैल हाथी उदयपुर विकासखंड के परसा-केते क्षेत्र स्थित कोयला खदान में पहुंच गया। झुंड से अलग हुआ हाथी करीब एक घंटे तक खदान परिसर और आसपास के इलाके में घूमता रहा। इस दौरान वहां मौजूद कामगारों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

बताया जा रहा है कि दंतैल हाथी पिछले कुछ दिनों से कोयला खदान से लगे पगोरिया जंगल में मौजूद है। शनिवार रात वन विभाग की टीम उसकी निगरानी करते हुए उसे जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास कर रही थी। इसी दौरान हाथी अचानक खदान क्षेत्र की तरफ बढ़ गया।

जिस समय हाथी खदान परिसर में पहुंचा, उस दौरान रात की पाली में काम करने वाले कर्मचारी वहां मौजूद थे। हाथी कभी सड़क की तरफ तो कभी खदान क्षेत्र में दौड़ता नजर आया। हाथी को खदान में देख कामगारों और आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।

वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर हाथी को वापस जंगल की ओर ले जाने का प्रयास शुरू किया। टीम ने हूटर और रोशनी वाली गाड़ी की मदद से हाथी को खदान क्षेत्र से दूर करने की कोशिश की। बताया गया कि तेज आवाज और रोशनी से हाथी और अधिक सक्रिय होकर इधर-उधर भागने लगा। काफी मशक्कत के बाद शनिवार सुबह करीब 4 बजे हाथी को जंगल की ओर खदेड़ दिया गया।

रेंजर एफ. चौबे के अनुसार, दंतैल हाथी फिलहाल पगोरिया जंगल के कक्ष क्रमांक 2126 में मौजूद है। वन विभाग की एलिफैंट ट्रैकर टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही है। प्रभावित गांवों में लाउडस्पीकर के माध्यम से हाथी की मौजूदगी की जानकारी दी जा रही है और ग्रामीणों को जंगल की ओर नहीं जाने की सलाह दी गई है।

सरगुजा संभाग में लंबे समय से हाथियों की आवाजाही होती रही है। यह क्षेत्र झारखंड की सीमा से जुड़ा होने के साथ ही हाथियों के आवागमन के पुराने रास्तों में शामिल माना जाता है। जशपुर और सरगुजा के जंगलों के रास्ते हाथियों के झुंड मध्य प्रदेश के शहडोल और अनूपपुर क्षेत्र तक भी पहुंचते हैं।

वन विभाग के मुताबिक, झुंड से अलग होकर अकेले घूमने वाले हाथियों को सामान्य तौर पर ‘लोनर’ हाथी कहा जाता है। ऐसे हाथियों से आमना-सामना होने पर खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि वन विभाग हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

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