शिक्षा ने बदली जिंदगी: पहाड़ी कोरवा युवती बनी प्रेरणास्रोत
कोरबा, 30 मार्च (हि. स.)। जिले के वनांचल क्षेत्र से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां विकासखंड कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़उपरोड़ा के कदमझेरिया गांव की रहने वाली राजकुमारी ने कठिन परिस्थितियों को पार कर अपनी मेहनत और शिक्षा के दम पर नई पहचान बनाई है। वह विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय से आती हैं।
गरीबी और अभावों के बीच पली-बढ़ी राजकुमारी का बचपन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। परिवार के साथ मजदूरी करना और जंगलों से वनोपज इकट्ठा कर जीवनयापन करना उनकी दिनचर्या थी। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल होता था।
परिवार ने पांचवीं कक्षा के बाद आगे पढ़ाई के लिए बाहर भेजने से मना कर दिया, लेकिन राजकुमारी ने हार नहीं मानी। उन्होंने सतरेंगा के आदिवासी कन्या आश्रम में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई जारी रखी। आठवीं तक की शिक्षा आश्रम में पूरी करने के बाद उन्होंने स्वाध्यायी छात्रा के रूप में 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।
इस दौरान सामाजिक ताने और रूढ़िवादी सोच भी उनके रास्ते में बाधा बनी, लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट था—शिक्षा के माध्यम से खुद को और अपने समुदाय को आगे बढ़ाना।
राजकुमारी की मेहनत रंग लाई। आदिवासी विकास विभाग द्वारा उन्हें कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया गया और जिला प्रशासन कोरबा के विशेष भर्ती अभियान के तहत 1 जनवरी 2022 को तहसील कार्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा में सहायक ग्रेड-03 के पद पर उनकी नियुक्ति हुई।
आज राजकुमारी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। सरकारी नौकरी मिलने के बाद उनके जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है। वह अपने परिवार के साथ शासकीय कॉलोनी पोंड़ी-उपरोड़ा में रह रही हैं, वहीं उनके ससुराल ग्राम कोनकोना में पक्का मकान भी निर्माणाधीन है।
राजकुमारी की सफलता ने न केवल उनके जीवन को बदला है, बल्कि पूरे पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। अब उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में कई युवा शिक्षा की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
राजकुमारी आज आशा, परिवर्तन और सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं, जो यह साबित करती हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति और शिक्षा के माध्यम से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

