धमतरी : बाल मधुमेह की समय पर पहचान जरूरी
धमतरी, 05 फ़रवरी (हि.स.)।
बच्चों में होने वाले टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में जिले के एएनएम एवं मितानिन प्रशिक्षकों के लिए आज गुरुवार काे एक दिवसीय विशेष उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को बाल मधुमेह से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, इसकी प्रारंभिक पहचान, उचित उपचार पद्धतियों तथा दीर्घकालिक प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारी देना रहा, ताकि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बच्चों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें। प्रशिक्षण के दौरान टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन, काउंसलिंग की भूमिका, रोगी सहायता समूह, समुदाय आधारित जागरूकता गतिविधियां, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और बाल मधुमेह से जुड़े व्यवहारिक पहलुओं पर सार्थक चर्चा की।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यू.एल. कौशिक ने कहा कि यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है, जिससे जमीनी स्तर पर बाल मधुमेह की पहचान और प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेमराज देवांगन, खंड चिकित्सा अधिकारी के सहयोग तथा यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में यूनिसेफ टीम द्वारा ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों एवं मितानिन प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मियों की शत-प्रतिशत सहभागिता रही, जो आने वाले समय में टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्रम में जे.पी. दीवान, प्रिया कंवर जिला कार्यक्रम प्रबंधक, रोहित पांडेय ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक एवं पुष्पेंद्र कुमार साहू ब्लॉक डेटा प्रबंधक का विशेष सहयोग रहा। एक दिवसीय इस उन्मुखीकरण कार्यशाला में कुल 65 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का द्वितीय चरण चाहीफ़रवरी 2026 को जिला धमतरी में आयोजित किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

