बिना किसी वित्तीय अनियमितता के कर दिया पद से बर्खास्त, कलेक्टर से शिकायत
धमतरी, 16 जून (हि.स.)। कुरुद ब्लाक के ग्राम पंचायत कोर्रा की निर्वाचित सरपंच यमुना कामड़े ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप के नियम विरुद्ध तरीके से पद से बर्खास्त किया गया। उन्होंने पूरे मामले को अनुसूचित जाति की महिला जनप्रतिनिधि के साथ अन्याय और मानसिक प्रताड़ना का उदाहरण बताया है। उन्होंने मामले की उचित जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंची यमुना कामड़े ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 में वे ग्राम पंचायत कोर्रा की पहली अनुसूचित जाति महिला सरपंच निर्वाचित हुई थीं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्हें पूर्व कार्यकाल के लगभग 33 लाख रुपये के कर्ज की जानकारी दी गई, लेकिन संबंधित बिल-वाउचर, तकनीकी स्वीकृति और अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। दस्तावेजों के अभाव में भुगतान से इनकार करने पर उन पर लगातार दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना दस्तावेजों वाली शिकायतों के आधार पर जनपद पंचायत स्तर से धारा 40 की कार्रवाई की अनुशंसा कर दी गई और 5 जनवरी 2026 को एसडीएम कुरूद ने बिना समुचित जांच और सुनवाई के उन्हें बर्खास्त कर दिया।
इसके खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय की शरण ली, जहां न्यायालय ने अंतरिम राहत देते हुए बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी। यमुना कामड़े का कहना है कि पंचायत के विभिन्न खातों और कर मदों में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिनकी शिकायत उन्होंने कई बार प्रशासन से की, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें ही पद से हटाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियमानुसार अनुसूचित जाति वर्ग के पंच को प्रभारी सरपंच बनाए जाने के बजाय अन्य पिछड़ा वर्ग के उपसरपंच को जिम्मेदारी सौंप दी गई।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी प्रकार का भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता नहीं थी तो फिर धारा 40 के तहत कार्रवाई किस आधार पर की गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई तथा यमुना कामड़े को न्याय दिलाने की मांग जिला प्रशासन और राज्य शासन से की है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

