अंबिकापुर: डिजिटल टोकन से बदली धान बिक्री की तस्वीर

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अंबिकापुर: डिजिटल टोकन से बदली धान बिक्री की तस्वीर


अंबिकापुर, 01 जनवरी (हि.स.)। सरगुजा जिले में धान उपार्जन केंद्रों पर शासन द्वारा लागू की गई सुव्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था का सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से धान विक्रय की प्रक्रिया अब पहले की तुलना में अधिक सरल, सुगम और समयबद्ध हो गई है।

तुहंर टोकन ऐप के माध्यम से 24×7 घर बैठे टोकन काटने की सुविधा मिलने से किसानों को उपार्जन केंद्रों में अनावश्यक इंतजार से मुक्ति मिली है।अंबिकापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत भकुरा निवासी मध्यम वर्गीय किसान अभिषेक पैकरा ने बताया कि वे नामनी किसान के रूप में धान विक्रय करते हैं। उनके पिता उदय कुमार पैकरा हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पर्याप्त वर्षा के चलते धान की पैदावार बेहतर हुई है। कुल 217 क्विंटल धान के लिए उन्होंने मोबाइल पर तुहंर टोकन ऐप के माध्यम से पहला टोकन 119.60 क्विंटल के लिए कटवाया है।

किसान अभिषेक पैकरा के अनुसार मोबाइल आधारित टोकन प्रणाली से समय, श्रम और खर्च की बचत हो रही है। अब किसानों को समितियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और घर बैठे ही टोकन मिल जाने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक बन गई है। इससे किसानों में संतोष और भरोसा बढ़ा है।

परसा धान उपार्जन केंद्र पहुंचने पर गेट पास, नमी परीक्षण और बारदाना वितरण की प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी की गई। केंद्र में किसानों के लिए पेयजल, बैठने सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे धान विक्रय की प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई।

श्री पैकरा ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को धान का सर्वाधिक समर्थन मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीद की व्यवस्था से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि धान के साथ-साथ वे गेहूं, तिलहन और सब्जी जैसी अन्य फसलों की खेती भी कर रहे हैं, जिससे उनकी कुल आमदनी में बढ़ोतरी हुई है।

किसान अभिषेक पैकरा ने वर्तमान धान खरीद व्यवस्था को किसान हितैषी बताते हुए इसकी सराहना की और कहा कि डिजिटल टोकन व्यवस्था से धान विक्रय अब सहज और भरोसेमंद हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की इस पहल से किसानों को वास्तविक लाभ मिल रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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