छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक भी बाघ की स्थाई मौजूदगी नहीं, 16 जनवरी से शुरू होगा बाघ आंकलन सर्वे
धमतरी, 15 जनवरी (हि.स.)।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के जंगलों में बाघ की संभावित मौजूदगी को लेकर एक बार फिर वन विभाग सतर्क हो गया है। पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में केरेगांव वन परिक्षेत्र अंतर्गत गंगरेल क्षेत्र के माकरदोना जंगल में बाघ के पद चिन्ह मिलने के बाद हड़कंप मच गया था। इसकी सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने संबंधित स्थल में पहुंचकर उसके पद चिन्हों का वैज्ञानिक तरीके से मापन कर बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की थी। वर्तमान में जिले में कोई भी बाघ की स्थाई मौजूदगी नहीं है।
अखिल भारतीय बाघ आंकलन 2026 के अंतर्गत धमतरी वन मंडल द्वारा 16 जनवरी से जिले के सभी 117 बीटों में दो पद्धतियों ट्रेल एवं ट्रांजिक्ट सर्वे के माध्यम से बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के पद चिन्ह, मल सहित उनकी गतिविधियों को लेकर आवश्यक सर्वे करेंगे।
अखिल भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के निर्देश पर हर चार वर्षों में बाघ का आंकलन किया जा रहा था। पूरे देश में बड़े पैमाने पर परभक्षियों तथा बाघ की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए चार वर्ष का समय काफी लंबा अंतराल था। जिस पर वन्यजीव संस्थान देहरादून ने अनुशंसा कर बाघ आरक्ष्यों तथा संरक्षित क्षेत्रों का आंकलन वर्ष में दो बार किया जाए। इसी क्रम में रायपुर वन वृत्त अंतर्गत मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्र संचालक उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व के निर्देश पर अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 के फेज -1 का कार्य सात से 26 जनवरी के मध्य पूर्ण किया जाना है। जिसके चलते धमतरी वनमंडल अंतर्गत केकती सेंटर दुगली में 14 जनवरी को बाघ गणना का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 16 जनवरी से जिले के हर बीट में बाघ आंकलन को लेकर सर्वे शुरू किया जा रहा है, जो छह दिनों तक चलेगा।
अधिकारियों ने बताया है कि पहली पद्धति ट्रेल सर्वे में बीट के अधिकारी और कर्मचारी तीन दिन में पांच किलो मीटर चलेंगे। जिसमें शाकाहारी वन्यप्राणी हाथी, गौर एवं वनभैंसा है जिन्हें मांसाहारी वन्यप्राणियों के साथ सम्मिलित किया गया है। इस सर्वे के दौरान जो भी प्रमाण जैसे कि पदचिन्ह, मल को ताजा व बहुत ताजा रूप में एकत्र करेंगे। वहीं दूसरी पद्धति ट्रांजिक्ट सर्वे में पहले तीन दिन में दो किलोमीटर चलेंगे। जिसमें शाकाहारी वन्यजीव दिखने पर उनकी गिनती अंशकोण से दूरी रखकर करेंगे। इस सर्वे में वापसी के समय वनस्पति एवं मानव व्यवधान के आंकड़े व शाकाहारी वन्यप्राणियों का मल का नमूना एकत्रित करेंगे। इस बाघ आंकलन सर्वे के दौरान यंग स्ट्रिप्स एप के माध्यम से बाघ सहित अन्य वन्यजीवों के पद चिन्ह, मल, दृश्य अवलोकन का रिकार्ड आनलाइन और आफलाइन माध्यम से दर्ज किया जाएगा। ट्रेल और ट्रांजिक्ट सर्वे के दौरान जीपीएस लोकेशन के माध्यम से तारीख और समय की सटीक जानकारी और एकत्रित डाटा को फोटो के साथ एप में दर्ज किया जाएगा।
वन मंडल धमतरी एसडीओ मनोज विश्वकर्मा ने आज बताया कि वर्ष 2025 के अक्टूबर महीने में केरेगांव वन परिक्षेत्र अंतर्गत गंगरेल बांध किनारे ग्राम माकरदोना के जंगल में बाघ के विचरण की जानकारी मिलने पर टीम ने पहुंचकर उनके पद चिन्हों का मापन कर उसकी मौजूदगी की पुष्टि की थी। यह बाघ कुम्हड़ाइन मंदिर होते हुए उत्तर सिंगपुर वन परिक्षेत्र से उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की ओर चले गया था। वर्तमान में जिले में बाघ की मौजूदगी की कोई जानकारी नहीं है।
डीएफओ धमतरी जाधव श्रीकृष्ण ने कहा कि वर्तमान में जिले में एक भी बाघ की मौजूदगी नहीं है। तीन महीने पहले बाघ के पद चिन्ह मिले थे। आज से हर बीट में छह दिवसीय बाघ आंकलन सर्वे शुरू होगा। जिसमें दो पद्धतियों में बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों के पद चिन्हों के निशान, मल सहित अन्य गतिविधियों की जानकारी को संकलित कर यंग स्ट्रिप्स एप के माध्यम से वन अनुसंधान संस्थान देहरादून को भेजा जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

