धमतरी जिले में अफीम की फसल ढूंढने निकले 300 अधिकारी-कर्मचारी, नहीं मिली खेती

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धमतरी जिले में अफीम की फसल ढूंढने निकले 300 अधिकारी-कर्मचारी, नहीं मिली खेती


धमतरी, 23 मार्च (हि.स.)। दुर्ग जिले में अफीम की खेती के बाद धमतरी जिले में भी अफीम की खेती की आशंका के चलते जिले में अधिकारी-कर्मचारी अफीम की फसल ढूंढने निकले। इस कार्य में 300 अधिकारी-कर्मचारी डटे रहे।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल द्वारा नगरी क्षेत्र में एक भाजपा नेता द्वारा 20 एकड़ जमीन पर अफीम खेती करने का आरोप लगाया, तो जिले के अधिकारी-कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, आरआई, पटवारी और कृषि अधिकारी, उद्यानिकी अधिकारी-कर्मचारी, कोटवार समेत करीब 300 अधिकारी-कर्मचारियों ने तीन दिनों तक जिले के 644 गांवों के खेत-खलिहान, कुआं, डबरी, बाड़ी समेत अन्य जलस्रोतों वाले जगहों पर पहुंचकर जांच किया।

वर्तमान सर्वे के अनुसार जिले के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद बताया गया है कि जिले में कहीं भी अफीम की अवैध खेती नहीं पाई गई है। दूसरी ओर नगरी ब्लाक समेत पूरे जिले के जागरूक लोगों समेत अन्य वर्गाें में अफीम खेती होने व बयानबाजी के बाद जेसीबी से पूरा खेत नष्ट करने की चर्चा तेज हो गई है, हालांकि इस बात की सिर्फ चर्चा है, जांच में भी हकीकत सामने नहीं आई है।

अवैध रूप से अफीम खेती मामले में आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य के सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर अपने-अपने जिलों में संभावित क्षेत्रों का सर्वे कर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रमाण-पत्र सहित 15 दिवस के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस निर्देश के परिपालन में धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपर कलेक्टर भू-अभिलेख को जिले में व्यापक सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस पर इंदिरा देवहारी अपर कलेक्टर एवं मनोज मरकाम, प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख द्वारा आनलाइन वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एसडीएम, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर क्षेत्रवार सर्वे कार्य की समीक्षा की गई। सभी संबंधित अमले द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में गहन निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया गया।

तहसीलवार मिले रिपोर्ट के अनुसार जिले में कहीं भी अवैध रूप से अफीम की खेती नहीं पाई गई है। शासन से मिले आदेश के बाद धमतरी जिले में अवैध अफीम खेती ढूंढने के सर्वे कार्य में जिले के तीन एसडीएम, 20 तहसीलदार व नायब तहसीलदार, 158 पटवारी, 99 कृषि अधिकारी, आठ उद्यानिकी अधिकारी, कोटवार समेत कुल 300 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, ताकि कोई भी जगह सर्वे होने से न छूट सके। जिले के 644 गांवों में अवैध अफीम खेती ढूंढा गया, लेकिन कहीं भी नहीं मिला। सभी पानी वाले स्रोतों पर भी ढूंढा गया। इन जगहों पर सब्जी, भाजी, पुदीना समेत अन्य फसल मिला।

धमतरी शहर समेत नगरी ब्लाक के कई गांवों में हो रही चर्चा के अनुसार ग्राम गैंदाभर्री में भारी मात्रा में अवैध ढंग से अफीम खेती की जा रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा धमतरी जिले के नगरी ब्लाक में एक भाजपा नेता द्वारा अवैध ढंग से अफीम खेती करने के आरोप चर्चित होने के बाद अफीम खेती को जेसीबी से नष्ट करने का आरोप है। इस गांव तक प्रशासन की टीम पहुंची, लेकिन उन्हें कहीं भी अफीम खेती नहीं मिला है।

इस संबंध में धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में अवैध अफीम की खेती कहीं नहीं है। जिले में कानून व्यवस्था एवं कृषि गतिविधियों की सतत निगरानी प्रशासन की प्राथमिकता है। अवैध गतिविधियों पर पूर्णतः रोक लगाने के लिए सभी विभागों के समन्वय से कार्य किया जा रहा है। वर्तमान सर्वे में जिले में कहीं भी अफीम की अवैध खेती नहीं पाई गई है, जो कि सकारात्मक संकेत है। आगे भी सतर्कता बनाए रखते हुए नियमित निरीक्षण एवं जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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