कोरबा : अटल परिसर निर्माण की फिर उठी मांग, चार साल से फाइलों में अटका बालको नया बिजली जोन

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कोरबा : अटल परिसर निर्माण की फिर उठी मांग, चार साल से फाइलों में अटका बालको नया बिजली जोन


कोरबा, 23 फरवरी (हि. स.)। गर्मी का मौसम नजदीक आते ही शहर में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विशेष रूप से बालको क्षेत्र को अलग बिजली जोन बनाए जाने का प्रस्ताव पिछले चार वर्षों से लंबित पड़ा है, जिससे पाड़ीमार जोन में उपभोक्ताओं पर बढ़ते लोड और बार-बार होने वाले पावरकट की समस्या बनी हुई है।

राज्य बिजली वितरण कंपनी के कोरबा सर्किल द्वारा शहरी क्षेत्र को वर्तमान में तीन जोन—तुलसी नगर, दर्री और पाड़ीमार में विभाजित किया गया है। पाड़ीमार जोन में निहारिका, कोसाबाड़ी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियां, दादरखुर्द सहित बालको सब स्टेशन से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं। इस जोन में करीब 28 हजार 700 उपभोक्ता हैं, जो तीनों जोनों में सर्वाधिक है। पूरे शहरी क्षेत्र में कुल 69 हजार 609 घरेलू व अन्य श्रेणी के उपभोक्ता दर्ज हैं।

बालको क्षेत्र की दूरी पाड़ीमार जोन कार्यालय से अधिक होने के कारण मेंटेनेंस कार्य समय पर करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। गर्मी के पीक आवर में लोड बढ़ने से ट्रिपिंग और पावरकट की शिकायतें आम हो जाती हैं। ऐसे में बालको को अलग जोन बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया था, ताकि लगभग 15 हजार उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिल सके और पाड़ीमार जोन का दबाव कम हो।

इस संबंध में बिजली वितरण कंपनी कोरबा सर्किल के अधीक्षण अभियंता बी.के. सरकार ने बताया कि बालको को अलग जोन बनाने का प्रस्ताव उनकी पदस्थापना से पहले ही भेजा जा चुका है। इस पर अंतिम निर्णय बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (बीओडी) की बैठक में होना है, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है।

इधर, दर्री फीडर से बांकीमोंगरा को अलग कर स्वतंत्र फीडर का दर्जा देने की मांग भी जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई है। नगर पालिका का दर्जा मिलने के बाद बांकीमोंगरा क्षेत्र में भी बिजली आपूर्ति सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और बढ़ती आबादी के मद्देनजर शहर में अतिरिक्त जोन की जरूरत अब अनिवार्य हो चुकी है। यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी गर्मी में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

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