एसीबी समूह की कोल वाशरियों की 1999 से जांच की मांग, दीपका में भारतीय जनाधिकार पार्टी का धरना

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एसीबी समूह की कोल वाशरियों की 1999 से जांच की मांग, दीपका में भारतीय जनाधिकार पार्टी का धरना


कोरबा, 18 अगस्त (हि. स.)। भारतीय जनाधिकार पार्टी ने एसीबी समूह की कोयला वाशरियों, संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन और अन्य औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े मामलों की वर्ष 1999 से वर्तमान तक स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मांग को लेकर पार्टी की ओर से 18 अगस्त को दीपका में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया।

आंदोलन के बाद कार्यपालन दंडाधिकारी एवं तहसीलदार दीपका अभिजीत राज भानु के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय कोयला मंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सहित केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

पार्टी ने मामले की जांच सीबीआई के माध्यम से कराने के साथ सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित करने और राज्य सरकार की ओर से स्वतंत्र बहु-विभागीय जांच दल बनाने की मांग रखी है। पार्टी का कहना है कि मामला केवल किसी एक कोल वाशरी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी कोयला, ईंधन, परिवहन और पर्यावरणीय व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

ज्ञापन में दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चाकाबुरा, रतिजा, रेंकी, बिंझारी समेत संबद्ध कोल वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, परिवहन व्यवस्था और अन्य औद्योगिक इकाइयों को जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है। पार्टी ने वाशरियों की स्थापना से लेकर वर्तमान तक स्वीकृत क्षमता, पर्यावरणीय स्वीकृति, संशोधित स्वीकृति, सीटीई-सीटीओ, वास्तविक कोयला प्राप्ति और प्रसंस्करण क्षमता का वर्षवार मिलान कराने की मांग की है।

भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कहा कि क्षमता विस्तार के दौरान पर्यावरणीय प्रावधानों, जनसुनवाई, ग्रामसभा और जहां लागू हो वहां पेसा संबंधी नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने उपलब्ध अभिलेखों में परिलक्षित बड़े पैमाने के कच्चे और रिजेक्ट कोयले के आवागमन का खदान से वाशरी, वाशरी से रेलवे या सड़क और वहां से ताप विद्युत संयंत्र तक स्वतंत्र मिलान कराने की मांग की है।

रिजेक्ट कोयले की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता, ऊष्मीय मान, नमूना परीक्षण, भंडारण, प्रेषण और अंतिम उपयोग की फोरेंसिक जांच की भी मांग की गई है। पार्टी ने आशंका जताते हुए कहा कि यह भी जांच होनी चाहिए कि कहीं उपयोगी या व्यावसायिक गुणवत्ता वाले कोयले को रिजेक्ट श्रेणी में दर्शाकर उसका अन्यत्र उपयोग या विचलन तो नहीं किया गया।

संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं में वास्तविक कोयला और रिजेक्ट कोयला प्राप्ति, ईंधन खपत, बिजली उत्पादन और राख उत्पादन का तकनीकी मिलान कराने की मांग की गई है। कोयला प्राप्ति और बिजली उत्पादन में असामान्य अंतर मिलने पर उसके कारण और संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच करने की बात कही गई है।

पार्टी ने सभी संबंधित इकाइयों के तौल कांटा सर्वर, डिजिटल लॉग, जीपीएस, फास्टैग, आरएफआईडी, एएनपीआर, सीसीटीवी, वाहन रिकॉर्ड, रेलवे रेक, प्रेषण पर्चियों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की स्वतंत्र डिजिटल फोरेंसिक जांच की मांग की है। इसके अलावा नदी, नालों, भूजल, कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई है।

कोल वाशरी, ताप विद्युत परियोजनाओं, रेलवे साइडिंग और भारी कोयला परिवहन से प्रभावित लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र में वायु प्रदूषण, धूल, राख, शोर, जल, कृषि भूमि और जनस्वास्थ्य पर प्रभाव का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। ज्ञापन में वर्ष 2015 से वर्तमान तक औद्योगिक डीजल, एचएसडी और बायोडीजल की खरीद, भंडारण, परिवहन और वास्तविक उपयोग का वर्षवार मिलान कराने की मांग की गई है।

धरना प्रदर्शन के दौरान भारतीय जनाधिकार पार्टी के कमल किशोर साव, कृष्ण टंडन, हेमंत पैगवार, संजय रत्नाकर, संतोष अनंत, अमर खांडे, बजरंग रत्नाकर, और योगेश सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तथा प्रभावित ग्रामों के पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। बारिश के बीच भी कार्यकर्ताओं ने धरना जारी रखा।

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

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