आदिवासी समाज की बैठक में सामाजिक एकता, संस्कृति और अधिकारों पर हुआ मंथन

WhatsApp Channel Join Now
आदिवासी समाज की बैठक में सामाजिक एकता, संस्कृति और अधिकारों पर हुआ मंथन


आदिवासी समाज की बैठक में सामाजिक एकता, संस्कृति और अधिकारों पर हुआ मंथन


आदिवासी नगारची समाज की वार्षिक महासभा में एकत्रित हुए समाजजन

धमतरी, 23 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ आदिवासी नगारची समाज की प्रदेशस्तरीय वार्षिक महासभा रविवार को शहीद वीर नारायण सिंह सामुदायिक भवन धमतरी में आयोजित हुई। महासभा में समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों के साथ आदिवासी समाज के अधिकारों, परंपराओं और वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से मंथन किया गया।

कार्यक्रम में अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी, धमतरी विधायक ओंकार साहू, सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम, अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद, महापौर रामू रोहरा एवं पूर्व विधायक रंजना साहू सहित अनेक अतिथि मौजूद रहे। अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 42 जनजातियां हैं और सभी प्रकृति पूजक हैं। आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, रहन-सहन और पारंपरिक रीति-रिवाजों से है, इसलिए अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को संजोकर रखना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि आदिवासी समाज के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर शासकीय सुविधाओं एवं अधिकारों का लाभ लेने वालों की पहचान होनी चाहिए। समाज को ऐसे मामलों को उजागर करने के लिए आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि समाज का विधिवत पंजीयन एवं बायलाज होना चाहिए और समय-समय पर उसका आडिट भी कराया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजातियों से संबंधित शिकायतों एवं प्रकरणों के निराकरण के लिए आयोग की व्यवस्था है। किसी भी समस्या या शिकायत को आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है, जिसकी जांच कर उचित निराकरण किया जाता है। अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष नेहरू निषाद ने कहा कि यह सम्मेलन सामाजिक समरसता का सम्मेलन है। ऐसे आयोजनों से समाज की एकता प्रदर्शित होती है और संगठन मजबूत होता है। आदिवासी समाज अपनी सामाजिक एकता एवं परंपराओं के प्रति सजग है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी समाज के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। धमतरी विधायक ओंकार साहू ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक समाज है और सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करता आया है। आदिवासी समाज लगातार विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अपने हक एवं अधिकारों के प्रति पहले से अधिक सजग हुआ है।

प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी समाज की पीड़ा और समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं हो पा रहा है। आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन का रखवाला समाज है। पूर्व विधायक रंजना साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति की पहचान को आदिवासी समाज ने आज भी बरकरार रखा है। आदिवासी समाज के कारण प्रदेश की अनेक पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराएं आज भी जीवित हैं। महासभा के मुख्य वक्ता केपी परधान (कचारगढ़) एवं राधेश्याम काकोड़िया (डिंडोरी-मंडला) ने आदिवासी समाज के इतिहास, पारंपरिक रीति-रिवाज, संस्कृति एवं देव व्यवस्था की विस्तृत जानकारी समाजजनों को दी।

महासभा में सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई, गोंड़ समाज के जिलाध्यक्ष माधव सिंह ठाकुर, सोमनाथ मंडावी, आदिवासी नगारची समाज के प्रदेश अध्यक्ष देवनाथ नेताम, आकाश गोलछा, खूबलाल ध्रुव, रामेश्वर मरकाम, रामनारायण नगारची, सरिता नगारची, दीपमाला ग्वाल, लक्ष्मी बघेल, केंवरा बाई नगारची, डामिन नगारची, संतोष नगारची, प्रेमकुमार नगारची, बलराम नगारची, टकेश्वर नगारची, देवेंद्र नगारची, राजेश नगारची, हेमंत नगारची, धनेंद्र नगारची, देवेश नगारची, राजेंद्र नगारची एवं सुनील नगारची सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

Share this story