डेयरी उद्यमिता से अंगेश्वर कुर्रे बने आत्मनिर्भरता की मिसाल, रोज 35 से 40 लीटर दूध उत्पादन
धमतरी, 12 अगस्त (हि.स.)। कुरूद विकासखंड के ग्राम करगा निवासी अंगेश्वर कुर्रे ने शासकीय योजनाओं, पशुधन नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीक को अपनाकर डेयरी व्यवसाय को अपनी मजबूत आजीविका का माध्यम बना लिया है। कभी सीमित संख्या में देशी गायों से कम दूध उत्पादन और आमदनी के साथ शुरुआत करने वाले अंगेश्वर आज करीब 25 उन्नत नस्ल की गायों का पालन कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार की प्रक्रिया अपनाई। उन्नत नस्ल की बछियों के पालन-पोषण के लिए उन्नत मादा वत्स पालन योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर छह क्विंटल पशु आहार भी मिला। वर्ष 2024-25 में राज्य डेयरी उद्यमिता योजना का लाभ लेते हुए उन्होंने दो उन्नत नस्ल की गिर गाय खरीदी, जिसके लिए उन्हें 66.6 प्रतिशत यानी 93,240 रुपये का शासकीय अनुदान मिला। वर्तमान में उनके डेयरी फार्म में जर्सी, गिर, साहिवाल, थारपारकर और रेड सिंधी नस्ल की करीब 25 गायें हैं और प्रतिदिन 35 से 40 लीटर दूध का उत्पादन होता है। वे आसपास के पशुपालकों से भी दूध खरीदकर अभनपुर और रायपुर जैसे शहरों में उसका विपणन करते हैं।
डेयरी व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह करीब 40 से 50 हजार रुपये की आय हो रही है। बढ़ी आय से उन्होंने पक्का मकान बनवाया और बच्चों की शिक्षा सहित परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया। उन्होंने पैरा कट्टी मशीन खरीदकर अतिरिक्त व्यवसाय भी शुरू किया है, जिससे दो से तीन लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है। अंगेश्वर की सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं, नस्ल सुधार, वैज्ञानिक तकनीक और उचित प्रबंधन को अपनाकर पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी कहानी ग्रामीण युवाओं और पशुपालकों के लिए प्रेरणा बन रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

