फसल नुकसान पर प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने अधिकारियों को खेतों में पहुंचकर सर्वे करने के दिए निर्देश

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फसल नुकसान पर प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने अधिकारियों को खेतों में पहुंचकर सर्वे करने के दिए निर्देश


फसल नुकसान पर प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने अधिकारियों को खेतों में पहुंचकर सर्वे करने के दिए निर्देश


बलौदाबाजार, 01 नवंबर (हि. स.)। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के चलते फसलों को हुए नुकसान को लेकर कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रभावित किसानों को फसल क्षति की सूचना 72 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी को देना अनिवार्य किया है। इसके लिए किसान टोल फ्री नंबर 14447 अथवा कृषि रक्षक पोर्टल के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी एचडीएफसी एर्गो को 10 दिनों के भीतर सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

कृषि विभाग के अनुसार यह प्रावधान कटाई के बाद खेत या खलिहान में रखी धान की फसल (करपा) के लिए 14 दिनों की अवधि तक लागू रहेगा। वहीं, वर्तमान में खड़ी फसल में जलभराव की स्थिति निर्मित होने पर योजना के तहत फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर बीमा दावा भुगतान की गणना की जाएगी।

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से प्रभावित खेतों का भ्रमण कर फसल क्षति का आकलन करने और रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य प्रभावित किसानों को आरबीसी 6-4 अथवा फसल बीमा योजना के तहत समय पर मुआवजा दिलाना है।

उप संचालक कृषि दीपक नायक ने बताया कि टोल फ्री नंबर 14447 पर फसल नुकसान की सूचना देते समय किसानों को अपना नाम एवं मोबाइल नंबर, बीमा पॉलिसी नंबर, नुकसान का विवरण, घटना की तारीख, ग्राम, तहसील एवं जिला का नाम, खसरा नंबर तथा बीमित फसल का नाम जैसी आवश्यक जानकारियां अपने पास रखनी होंगी, ताकि शिकायत पोर्टल पर दर्ज करने में आसानी हो।

किसानों को दी गई ये जरूरी सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि तेज हवा और बारिश के कारण गिरी हुई धान, दलहन एवं तिलहन की पककर तैयार फसलों की कटाई सूखने के बाद हाथ से करें। कटी हुई फसलों को अच्छी तरह सुखाकर सुरक्षित स्थान पर रखें। खेतों में जमा अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था जल्द से जल्द करें।

इसके अलावा किसानों को अपने खेतों की लगातार निगरानी करने की सलाह दी गई है। फसलों में कीट एवं बीमारियों के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद अनुशंसित कीटनाशकों एवं कवकनाशकों का छिड़काव करें, ताकि फसलों को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर

Livevns.news Desk
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