तकनीकी युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी ढाल, युवा बनें समाज के सुरक्षा दूत : अरुण साव

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तकनीकी युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी ढाल, युवा बनें समाज के सुरक्षा दूत : अरुण साव


जगदलपुर, 11 सितंबर (हि.स.)। बस्तर विश्वविद्यालय परिसर के सभागार में आज शुक्रवार काे जिला पुलिस द्वारा आयोजित ‘साइबर जन-जागृति अभियान’ के अंतर्गत कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन अपराधों की रोकथाम पर गहन मंथन हुआ।

समारोह के मुख्य अतिथि, छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने युवाओं और जनसमूह को संबोधित करते हुए साइबर सुरक्षा को वर्तमान युग की अनिवार्य आवश्यकता बताया। उप मुख्यमंत्री साव ने बदलते समय की तुलना करते हुए कहा कि पहले घरों की सुरक्षा के लिए सामान्य सांकल या ताले पर्याप्त थे। लेकिन आज, तकनीक के तेज विस्तार से पूरी दुनिया एक मोबाइल में सिमट गई है। जब वित्तीय लेन-देन और सभी महत्वपूर्ण कार्य डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं, तो अपराधियों के तौर-तरीके भी बदल चुके हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोग अक्सर डर, लालच, अत्यधिक अंधविश्वास और जल्दबाजी के चलते जालसाजों के जाल में फंसते हैं। किसी अनजान धमकी के खौफ में आना, कम समय में अधिक लाभ का लोभ, बिना पड़ताल के भरोसा करना या निजी जानकारी व ओटीपी साझा कर देना ही अपराध का रास्ता खोलता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे स्वयं तकनीकी रूप से सक्षम हैं, इसलिए यह उनकी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि वे घर के बुजुर्गों, माता-पिता और कम पढ़े-लिखे नागरिकों को इस खतरे के प्रति सचेत करें, ताकि किसी भी गरीब या आम व्यक्ति की मेहनत की कमाई न लुट जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस का काम एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई करना है, लेकिन ठगी होने से पहले ही समाज को सुरक्षित रखने की असली कमान युवा पीढ़ी के हाथों में है। भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव की चर्चा करते हुए उन्होंने प्रेरक पंक्तियों से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया।

जगदलपुर के महापौर संजय पाण्डे ने भी डिजिटल युग में बढ़ रहे अपराधों को लेकर नागरिकों को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि अपराधियों की कार्यशैली बदल चुकी है; वे घरों की चहारदीवारी फांदने के बजाय मोबाइल स्क्रीन के जरिए चुपचाप हमारे निजी जीवन में दाखिल हो रहे हैं। महापौर ने केवाईसी अपडेट, पार्सल डिलीवरी और रकम दोगुनी करने के झांसे देकर होने वाली ठगी के उदाहरण दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक या पुलिस कभी गोपनीय विवरण नहीं मांगती। लोगों को समझना होगा कि यूपीआई पिन हमेशा पैसे भेजने के लिए दर्ज किया जाता है, पैसे प्राप्त करने के लिए कभी नहीं।

पासवर्ड किसी को न बताना, ओटीपी गोपनीय रखना, अनजान लिंक पर क्लिक न करना, निजी पहचान सार्वजनिक न करना और अपरिचितों से ऑनलाइन चैटिंग से परहेज करना। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने साफ किया कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। घबराने के बजाय तत्काल कॉल काटें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कम से कम दस से पंद्रह लोगों को जागरूक कर इस अभियान के सक्रिय दूत बनें।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बस्तर पुलिस की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि विगत एक दशक में देश डिजिटल क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है, और लगभग 86 प्रतिशत परिवार इंटरनेट से जुड़ चुके हैं। इसके साथ ही साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। राष्ट्रीयस्तर पर वर्ष 2022 में 10 लाख साइबर मामले सामने आए थे, जो 2024 तक बढ़कर 22 लाख से अधिक हो गए, और पीड़ितों को लगभग 31,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। छत्तीसगढ़ में भी मामलों की वृद्धि दर चिंताजनक है। कुलपति ने युवाओं को 'साइबर हाइजीन' और डिजिटल साक्षरता का पाठ पढ़ाने की अनिवार्यता पर जोर दिया।

नागरिकों से सीधे संवाद करते हुए पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने शातिर ठगों के नए तौर-तरीकों से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पुलिस के अभियानों के तहत अब तक जिले के लगभग साढ़े तीन से चार लाख लोगों को जागरूक किया जा चुका है। सिन्हा ने एपीके फाइल आधारित फ्रॉड पर आगाह किया। जालसाज बिजली बिल, ट्रैफिक चालान, आरटीओ नोटिस या शादी के डिजिटल निमंत्रण के नाम पर संदेश भेजकर लोगों को झांसे में लेते हैं, और इन फाइलों को डाउनलोड करते ही मोबाइल का नियंत्रण हैकर्स के हाथों में चला जाता है। उन्होंने किसी भी अनजान लिंक या एपीके फाइल पर क्लिक न करने की अपील की, भले ही वह संदेश किसी परिचित से आया हो। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के झूठे भय पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस हमेशा भौतिक रूप से उपस्थित होकर ही कानूनी कार्रवाई करती है।

एसपी ने व्हाट्सएप पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखने, सोशल मीडिया प्रोफाइल सुरक्षित रखने और निजी दिनचर्या सार्वजनिक मंचों पर साझा न करने का सुझाव दिया। उन्होंने अंत में कहा कि यदि कोई व्यक्ति ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना देर किए तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दे, ताकि बैंक स्तर पर लेन-देन रोककर डूबी रकम वापस दिलाई जा सके।

इस कार्यक्रम में नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन पुलिस महानिरीक्षक बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा सहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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