कोयला सर्वे के विरोध में 15 गांवों के ग्रामीण एकजुट, आदिवासी महासम्मेलन में उठा जल-जंगल-जमीन बचाने का मुद्दा
कोरबा, 03 जनवरी (हि. स.)।छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के जिलगा-मदनपुर-राजाडीह क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला सर्वेक्षण के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को 15 गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर आदिवासी महासम्मेलन का आयोजन किया और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्रामसभा की सहमति और जानकारी के कोयला सर्वे का कार्य किया जा रहा है, जो वनाधिकार कानून और पंचायत अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण रैली निकालकर प्रशासन और संबंधित विभागों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इससे पहले भी सर्वे टीम और वन विभाग के पहुंचने पर ग्रामीणों ने काम रोक दिया था। महासम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि ग्रामसभा से न तो कोई प्रस्ताव लिया गया है और न ही परियोजना के संभावित प्रभावों की जानकारी ग्रामीणों को दी गई है, ऐसे में यह सर्वे पूरी तरह अवैधानिक है।
सभा को संबोधित करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि वे पीढ़ियों से इस भूमि, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। कोयला परियोजना से बड़े पैमाने पर विस्थापन, आजीविका पर संकट, वनाधिकारों की समाप्ति और पर्यावरण को गंभीर नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे विकास के नाम पर बिना सहमति थोपे जाने वाले किसी भी फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे।
महासम्मेलन में मांग की गई कि जब तक ग्रामसभा की विधिवत बैठक आयोजित कर ग्रामीणों की सहमति नहीं ली जाती, तब तक सर्वेक्षण और उससे जुड़े सभी कार्य तत्काल रोके जाएं। साथ ही अधिकारियों से परियोजना से जुड़ी पारदर्शी जानकारी देने, पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक करने और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करने की मांग की गई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इस महासम्मेलन में कोलगा, मदनपुर, पसरखेत, गेराव, चचिया, तौलीपाली, कटकोना, जिलगा, बरपाली, गिरारी, लबेद, गितकुवारी, फुलसरी, बासीन और सोल्वा ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
महासम्मेलन में सांसद ज्योत्सना महंत, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया और कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनोज चौहान सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। उन्होंने ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना गलत है और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

