एमसीबी : स्वच्छता प्रहरियों ने कबाड़ हो चुके 275 शौचालयों को संवारा, स्वच्छता के साथ कमाई का पेश किया अनोखा मॉडल

WhatsApp Channel Join Now
एमसीबी : स्वच्छता प्रहरियों ने कबाड़ हो चुके 275 शौचालयों को संवारा, स्वच्छता के साथ कमाई का पेश किया अनोखा मॉडल


मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में स्वच्छता अभियान अब केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीणों की आजीविका का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। जिले के स्वच्छता प्रहरियों ने अपनी मेहनत और कौशल से स्वच्छता को आय के एक सफल मॉडल में तब्दील कर दिया है, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है। इस अभिनव पहल के तहत स्वच्छता प्रहरियों ने जिले के विभिन्न गांवों में क्षतिग्रस्त और बंद पड़े 275 शौचालयों की मरम्मत कर उन्हें दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया है। इस मरम्मत कार्य से न केवल ग्रामीणों को सुविधा मिली है, बल्कि प्रहरियों ने अब तक 63,230 रुपये की सम्मानजनक आय भी अर्जित की है।

स्वच्छता प्रहरियों ने इस कार्य के दौरान तकनीकी बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया, जिसमें जाम हो चुके यूरिनल पैन को खोलना, बंद पाइप लाइनों को दुरुस्त करना, चैंबरों की सफाई और टूटी हुई टाइल्स की फिटिंग जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल थे। मरम्मत के साथ-साथ स्वच्छता की निरंतरता बनाए रखने के लिए करीब 200 शौचालयों की नियमित सफाई का बीड़ा भी उठाया गया है। नियमित देख-रेख और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित होने से ग्रामीणों में इन शौचालयों के प्रति विश्वास बढ़ा है, जिसका सीधा असर गांवों के स्वास्थ्य और स्वच्छता स्तर पर दिखाई दे रहा है।

इस मुहिम का सबसे सकारात्मक पहलू खुले में शौच की प्रवृत्ति में आई भारी कमी है। जो शौचालय रख-रखाव के अभाव में अनुपयोगी होकर कबाड़ में तब्दील हो रहे थे, उनके दोबारा शुरू होने से लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब ग्रामीण खुले में जाने के बजाय इन स्वच्छ और सुरक्षित शौचालयों का उपयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे 'स्वच्छ भारत मिशन' के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने वाली एक मिसाल बताया है। यह मॉडल न केवल ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बना रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के स्थायी अवसर पैदा कर स्वच्छता प्रहरियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना रहा है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

Share this story