छग :धमतरी जिले के ग्राम जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की तैयारी
रायपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। कृषि को पर्यावरण के अनुकूल बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में धमतरी जिले के ग्राम जोरातराई नवीन को प्रदेश का पहला कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की तैयारी है। इसके लिए खेती में पानी की बचत करने वाली ए डबल्यू डी तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है।जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
जोरातराई नवीन को कार्बन न्यूट्रल गांव बनाने की पहल के तहत कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही कार्बन क्रेडिट के माध्यम से पात्र किसानों को संभावित अतिरिक्त आर्थिक लाभ दिलाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
यह पूरी परियोजना धमतरी जिला प्रशासन के नेतृत्व और दिशा-निर्देश में चलाई जा रही है।
इस प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन ने जलवायु प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम करने वाली प्रसिद्ध संस्था 'प्रिथु' के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्राइवेट पार्टनर 'प्रिथु' के को-फाउंडर प्रबल तोमर ने बताया है कि क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप 'प्रिथु' इस पूरी कार्बन फार्मिंग पहल के तहत अगले तीन वर्षों में लगभग ₹5 करोड़ का निवेश करेगी।
इस परियोजना का सबसे बड़ा आर्थिक पहलू यह है कि पर्यावरण अनुकूल खेती से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार कार्बन क्रेडिट जनरेट होंगे।अधिकारियों ने बताया है कि इन कार्बन क्रेडिट्स की वैश्विक बाजार में बिक्री से धमतरी जिले के स्थानीय किसानों की जेब में जीवनचक्र के दौरान लगभग ₹250 करोड़ की अतिरिक्त आय सीधे पहुंचने का अनुमान है।
जिला प्रशासन ने बताया है कि धमतरी जिले में कृषि गतिविधियों, ट्रैक्टरों और अन्य उपकरणों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। गांव में सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही ग्रीन कवर (हरियाली) को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय पौधों का रोपण किया जा रहा है, जो हवा से कार्बन सोखने में मदद करेंगे। इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और किसानों को खेती के नए विकल्प उपलब्ध कराना है।
धान की खेती में पानी की खपत कम करने और मीथेन उत्सर्जन घटाने के लिए अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (ए डबल्यू डी) तकनीक का विस्तार किया जा रहा है। इस तकनीक में खेतों में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय जरूरत के अनुसार अंतराल पर सिंचाई की जाती है। इससे सिंचाई के लिए पानी की बचत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही धान के खेतों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने की संभावना भी रहती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में ए डबल्यू डी तकनीक अपनाने के लिए पात्र किसानों की लगभग 95 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग, प्रशिक्षण और क्रियान्वयन संबंधी कार्य पूरे हो चुके हैं। यह पहल जोरातराई नवीन को पर्यावरण अनुकूल कृषि के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कलेक्टर ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कृषि विविधीकरण, जल संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल खेती को एक साथ बढ़ावा देकर जिले में टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
जिला कलेक्टर अबिनाश मिश्रा का कहना है कि यह अनूठी पहल धमतरी जिले के कृषि विकास और संवर्धन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। हमारा जिला हमेशा से ही नवाचार और लीक से हटकर किए जाने वाले विकास कार्यों में आगे रहा है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ पर्यावरण को बचाएगा बल्कि कृषि के क्षेत्र में एक नया मॉडल स्थापित करेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

