बायोफ्लॉक मछली पालन से शारदा कौशिक की बदली आर्थिक स्थिति, अब हर माह कमा रहीं 20 हजार रुपये

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बायोफ्लॉक मछली पालन से शारदा कौशिक की बदली आर्थिक स्थिति, अब हर माह कमा रहीं 20 हजार रुपये


कोरबा, 27 सितम्बर (हि. स.)। कटघोरा विकासखंड के ग्राम रंजना के तिलवारी पारा निवासी शारदा कौशिक के लिए बायोफ्लॉक मछली पालन आय का नया जरिया बन गया है। कभी खेती-किसानी से होने वाली सीमित आमदनी के सहारे परिवार चलाने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने वाली शारदा अब आधुनिक तकनीक से मछली पालन कर लगभग 20 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और खेती के साथ अतिरिक्त आय का मजबूत सहारा मिला है।

शारदा कौशिक का परिवार पहले मुख्य रूप से खेती-किसानी पर निर्भर था। पति अमृतलाल के साथ परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। शारदा के मुताबिक, पहले उनकी आमदनी लगभग एक हजार रुपये प्रतिमाह तक सीमित थी। परिवार की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने आजीविका के नए साधन की तलाश शुरू की और इसी दौरान मत्स्य विभाग से संपर्क किया।

मत्स्य विभाग के माध्यम से शारदा को बायोफ्लॉक तकनीक की जानकारी मिली। इस तकनीक की खासियत यह है कि सीमित जगह और कम पानी में भी मछली पालन किया जा सकता है। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इस तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया और वर्ष 2024-25 में बायोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। शारदा के अनुसार, इस कार्य में करीब 14 लाख रुपये की लागत आई। योजना के तहत उन्हें तालाब निर्माण के साथ जनरेटर सहित आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया गया।

बायोफ्लॉक यूनिट शुरू होने के बाद शारदा ने तालाब में मछली पालन शुरू किया। तैयार होने वाली मछलियों को वह स्थानीय बाजार में बेचती हैं। मछली की बिक्री से उन्हें अब लगभग 20 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी हो रही है। इससे परिवार को खेती से होने वाली आय के अलावा नियमित अतिरिक्त आमदनी का जरिया मिला है।

शारदा बताती हैं कि पहले केवल खेती-किसानी की आय से परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। बायोफ्लॉक मछली पालन की आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद उनकी आय में बदलाव आया है। मत्स्य विभाग से मिली जानकारी और योजना के तहत मिले सहयोग ने उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया।

शारदा कौशिक की कहानी यह बताती है कि आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं का प्रभावी उपयोग ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकता है। सीमित संसाधनों में बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन शुरू कर शारदा ने खेती के साथ अपनी आय का नया स्रोत तैयार किया है। अपनी आर्थिक स्थिति में आए बदलाव से खुश शारदा ने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

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