बस्तर के लाेक आस्था के पर्व गाेंचा-दशहरा की परंपराओं काे अक्षुण बनाये रखना हम सबका कर्तव्य है : उमाशंकर शुक्ला
जगदलपुर, 17 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ कांग्रेस कमेटी रायपुर के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने आज शुक्रवार काे प्रेस विज्ञिप्त जारी करते हुए बताया कि बस्तर के प्रसिद्ध बस्तर गोंचा महापर्व के दौरान गुरुवार को जगदलपुर में भगवान श्रीजगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र स्वामी की भव्य रथयात्रा निकाली गई।
उन्हाेेने बताया कि रथयात्रा के दौरान भीड़ के बीच एक महिला जिसका नाम कानून मंडल 55 वर्ष जगदलपुर निवासी बताया जा रहा है। रथ के नीचे आ जाने से इस महिला का दाेनाे हाथ रथ के पहिए के नीचे आ गया, जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसे देखकर मन विचलित हो गया। मौके पर मौजूद पुलिस जवानों और श्रद्धालुओं ने महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया जहां उसका उपचार जारी है। जिसके ज्ल्द स्वस्थ हाेने की कामना करता हू।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि पहली बार लाेक आस्था के रियासत कालीन बस्तर गोंचा महापर्व के रथयात्रा के दौरान इस तरह की दुखद दुर्घटना के हाेने से पूरे शहर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है, आखिर ऐसा क्यो हुआ जानकारों से मेरी चर्चा में यह बात सामने आई कि यह दुर्घटना कहीं ना कहीं कुछ बड़ा संकेत माना जा रहा है। इस संबध में मैने बस्तर गोंचा महापर्व के पूजा विधान से जुड़े जानकाराें से चर्चा करने पर उन्हाेने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ इस कलयुग में साक्षात विराजमाान हैं।
उन्हाेंने बताया कि बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव के द्वारा गोंचा महापर्व की परंपराओं के साथ खिलवाड़ करने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बस्तर के प्रथम महाराजा से लेकर अंतिम महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव तक बस्तर गोंचा महापर्व की परंपराओं में कभी भी शामिल नही हुए। परंपरानुसार बस्तर गोंचा महापर्व में प्रतिवर्ष बस्तर राज परिवार के द्वारा श्रीगोंचा पूजा विधान के लिए पूजन सामग्री की थाल सजाकर भिजवाया जाता था। श्रीगोंचा पूजा विधान में जब भगवान श्रीजगन्नाथ माता सुभद्रा एवं बलभद्र स्वामी की विग्रहो को तीनों रथों में रथारूढ़ करने के बाद बस्तर राज परिवार के द्वारा भेजे गये पूजन सामग्री को सबसे पहले अर्पित कर प्रसाद बस्तर राज परिवार को भिजवाये जाने की परंपरा थी।
इसके बाद समाज ने पर्व को भव्यता प्रदान करने एवं राजपरिवार के कारण ही बस्तर गोंचा के बस्तर में अवतरण होने से इसे प्रत्यक्ष तौर पर जोड़ने के लिए राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव शामिल करने का निणर्य लिया गया और राज परिवार के पूजन सामग्री की थाल के साथ शामिल होकर मात्र उस परंपरा के निर्वहन करना था, लेकिन बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव ने इस परंपर का उलंघन इस वर्ष किया गया, संभवत: इससे हमें छेरा बहारा पूजा विधान के तुरंत बाद में यह दुर्घटना होना मन के व्यथित करता है। वहीं उन्हाेने इस दुर्घटना को लेकर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि समय के साथ भगवान श्रीजगन्नाथ पर बढ़ती आस्था से भीड़ भी बढ़ती जा रही है, मेरा श्रद्धालुओं से निवेदन है कि रथयात्रा के दाैरान भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन दूर से करें और अपने को सुरक्षित रखे।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि पहली बार लोक आस्था के रियासत कालीन बस्तर गोंचा महापर्व परंपराओं को हम सबको मानना चाहिए इसके साथ किसी को भी खिडवाड़ नही करना चाहिए। अपनी दिखावे की प्रतिष्ठा के लिए राजनेता भी एसी गलती करते हैं, जिससे इसका गलत प्रभाव जिसकी आज चर्चा का विषय बना हुआ है, इस पर विराम लगाने की आवश्यकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

