पाट जात्रा पूजा विधान के साथ शुरू विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा महापर्व
जगदलपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में (बुधवार)हरेली अमावस्या के अवसर पर मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में पारंपरिक पाट जात्रा पूजा-विधान के साथ 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा महापर्व की शुरुआत होगी । इस प्रथम रस्म में रथ निर्माण के लिए लाई गई विशेष लकड़ी 'ठुरलू खोटला' और पूजन औजारों की विधि-विधान से पूजा की की जाएगी । बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में हरेली अमावस्या के मौके पर रथ निर्माण की पहली लकड़ी के पूजा विधान काे पाट जात्रा पूजा विधान कहते हैं।
पाट जात्रा पूजा विधान में मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादार रथ निर्माण के कारीगर शामिल हाेंगे। इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति द्वारा मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों सहित गणमान्य नागरिकों एवं ग्रामीणों को उपस्थित होकर पाट जात्रा पूजा विधान में शामिल होने का आग्रह किया गया है।
रथ निर्माण से जुड़े पारंपरिक कारीगरों (झाड़ूराम और अन्य सदस्यों) का कहना है कि पाट जात्रा पूजा के तुरंत बाद लकड़ी की छंटाई और औजारों की सान चढ़ाने का काम शुरू कर दिया जाता है। चूंकि बस्तर दशहरा पूरी तरह प्रकृति और मां दंतेश्वरी को समर्पित है, इसलिए सभी आदिवासी समुदाय अपनी सदियों पुरानी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हैं।
पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ही बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस 75 दिवसीय ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के निर्धारित कार्यक्रम मेंं गुरूवार 24 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, शनिवार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा विधान, रविवार 11 अक्टूबर को कलश स्थापना पूजा विधान, सोमवार 12 अक्टूबर को जोगी बिठाई पूजा की जाएगी। विधान सहित मंगलवार 13 अक्टूबर से रविवार 18 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान से की जाएगी। रविवार 18 अक्टूबर को सुबह 11 बजे बेल पूजा विधान, सोमवार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान किया जायेगा ।मंगलवार 20 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, बुधवार 21 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान किया जायेगा।
गुरूवार 22 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 23 अक्टूबर को सुबह काछन जात्रा पूजा विधान के पश्चात दोपहर में मुरिया दरबार का आयोजन होगा। वहीं शनिवार 24 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई की जाएगी और मंगलवार 27 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

