बलरामपुर के तीन गांवों में 50 एकड़ में होगी सरसों की खेती, जनजातीय किसानों को मिले उन्नत बीज

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बलरामपुर के तीन गांवों में 50 एकड़ में होगी सरसों की खेती, जनजातीय किसानों को मिले उन्नत बीज


बलरामपुर, 03 नवंबर (हि.स.)।बलरामपुर जिले के जनजातीय किसानों को तिलहन उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को बलरामपुर विकासखंड के अतौरी, झालरिया और बुखा गांव में सरसों के उन्नत बीज वितरित किए गए।

टीएसपी तिलहन परियोजना के तहत आयोजित बीज वितरण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को करीब 50 एकड़ क्षेत्र में सरसों की खेती के लिए उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध कराए गए। इस पहल से जिले के आदिवासी अंचलों में सरसों की खेती का रकबा बढ़ने और किसानों को आय का अतिरिक्त साधन मिलने की उम्मीद है।

यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की ओर से भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के सहयोग से संचालित टीएसपी तिलहन परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में तिलहन उत्पादन की आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर उत्पादकता और किसानों की आजीविका में सुधार करना है।

कार्यक्रम तिलहन परियोजना के राज्य प्रमुख अन्वेषक डॉ. नंदन मेहता, राज्य समन्वयक डॉ. संजय द्विवेदी तथा परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर के सह-संचालक अनुसंधान डॉ. केएल पैंकरा के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस दौरान परिक्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर के परियोजना प्रमुख अन्वेषक एवं शस्य वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, तकनीकी सहायक डॉ. अखिलेश लकड़ा, कृषि विज्ञान केंद्र बलरामपुर के शस्य वैज्ञानिक डॉ. इन्द्रपाल पैकरा और मृदा वैज्ञानिक डॉ. अमीना एक्का मौजूद रहे।

बीज वितरण के साथ कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सरसों सहित अन्य तिलहनी फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कतार में बोआई, बीज उपचार, फसल प्रबंधन और भूमि सुधार के तरीकों को समझाया। साथ ही बेहतर उत्पादन के लिए सल्फर के महत्व तथा खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों के संतुलित एवं किफायती उपयोग के बारे में भी बताया।

विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। परियोजना के माध्यम से किसानों को उन्नत बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर जिले के जनजातीय क्षेत्रों में तिलहन खेती को विस्तार देने का प्रयास किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

Livevns.news Desk
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