निरंकुश कुलपति ने छत्तीसगढ के भाजपा सरकार काे ही कटघरे में खड़ा कर दिया : उमाशंकर शुक्ला

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निरंकुश कुलपति ने छत्तीसगढ के भाजपा सरकार काे ही कटघरे में खड़ा कर दिया : उमाशंकर शुक्ला


जगदलपुर, 20 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ कांग्रेस कमेटी रायपुर के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने आज साेमवार काे प्रेस विज्ञिप्ति जारी कर कहा कि विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज श्रीवास्तव पर जगलपुर के पूर्व विधायक ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों से लाखाे के लेन-देन करने का आरोप लगाए थे। विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज श्रीवास्तव सत्ताधारी भाजपा के जगलपुर के पूर्व विधायक पर ही अनर्गल बयान देकर विश्वविद्यालय और उनकी छवि को धूमिल करने एवं भर्ती में लेन-देन का प्रमाण देने की चुनाैती देकर भाजपा सरकार काे ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।

उन्हाेंने कहा कि विश्वविद्यालय के निरंकुश कुलपति मनोज श्रीवास्तव ने जगलपुर के पूर्व विधायक काे उनके लगाये गये आरोपाें के लिए खुली चुनाैती दी है, जिसे स्वीकार कर भर्ती प्रक्रिया में हुए भ्रष्टाचार काे उजागर कर इसका पटाक्षेप करने का साहस दिखाना चाहिए।

कुलपति के मीडिया में छपे बयान को गंभीरता से लेते हुए बस्तर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया और कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव की गतिविधियां पिछली भर्ती से ही संदिग्ध रहा है। कुलपति कह रहे हैं कि आरोप निराधार साबित हुआ तो कुलपति जांघ रिपोर्ट सार्वजनिक अब तक क्यों नहीं किए ? उन्हाेंने कहा कि अब तक बस्तर के स्थानीय जनप्रतिनिधि पूर्व विधायक संतोष बाफना, पूर्व विधायक राजाराम तोडेम, पूर्व मंत्री अरविंद नेताम, कार्य परिषद सदस्य रहे पूर्व कुलपति एसके. पाण्डेय एवं स्वयं सहित कई लोगों ने तथ्यो के साथ लगातार इस मामले को उठाया है। यहां तक की सत्ता पक्ष के विधायक लता उसेंडी, अजय चंद्राकर और विपक्षी विधायक देवेन्द्र यादव ने भी शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय के भर्ती पर भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा में उठाया था, परंतु सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। सैकड़ों अभ्यर्थियों ने पिछली भर्ती के भ्रष्टाचार पर एकजुट होकर अनेक फोरमों में कुलपति के विरुद्ध नामजद सैकड़ों शिकायतें दर्ज किया था, परंतु सैकड़ों शिकायतकर्ताओं में से सिंगल शिकायतकर्ता को बुलाकर आरोपो के संबंध में नहीं पूछा गया।

उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि कहा कि कुलपति यह भी बताए की यूजीसी भर्ती नियम और रेगुलेशन में कहां पर लिखा है कि बिना उम्मीदवारों के नाम जारी किए मात्र एप्लिकेशन आइडी से पात्र अपात्र सूची जारी किया जाता है। जबकि यूजीसी नियम साफ कहता है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होना चाहिए। लेकिन कुलपति का कहना है कि आरक्षित पदों पर केवल छत्तीसगढ़ के पात्र अभ्यर्थियों का ही चयन संभव है। वहीं अनारक्षित पदों पर बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों के संबंध में माैन रहना, क्या लगाये गये आराेपाें की ओर इशारा नहीं करता है। पूरी भर्ती प्रक्रिया में गोपनीयता बरतने एवं पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों की सूची में से आवेदकों के नाम गायब कर बिना नाम और बिना अंकों के सूची जारी होने से दावा-आपत्ति की पूरी प्रक्रिया काे क्या दूषित नहीं करता है। भर्ती प्रक्रिया में शामिल आवेदकाें को यह जानने का हक है कि, उसे किस आधार पर पात्र या अपात्र किया गया है। इसके अलावा, योग्य उम्मीदवारों को बिना कारण बताए नॉट फाउंड सूटेबल घोषित कर देना एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों की उपेक्षा करने जैसी गंभीर अनियमितताओं काे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। कुलपति यह भी बताए कि मेरिट सूची में प्रथम दस स्थान पर रहने वाले प्रतिभाशाली और उच्च योग्यता थारी उम्मीदवारो को छोड़कर मेरिट सूची के अंतिम पायदान के अपने चहेते उम्मीदवारो को साक्षात्कार में अधिक अंक देकर कैसे चयन किया गया।

उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि कुलपति कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार के प्रमाण देने पर तत्काल इस्तीफा दे देंगे तो इसका जवाब यह है कि चोर विडियो शूटिंग करवाकर चोरी नहीं करता है, जिसका वीडियो रिकॉर्डिंग हो, चोरी तभी पकड़ में आता है जब तथ्यो की सही तरीके से जांच की जाए। यदि कुलपति में हिम्मत है तो स्वयं के और जो चयनित हुए हैं उन सभी के पिछले एक वर्ष का काल रिकार्ड और बैक खातों की जांच कराए सब कुछ प्रमाण और सबूत खुद बखुद बाहर आ जाएगा। भाजपा सरकार में जरा भी नैतिकता है तो इस भ्रष्ट कुलपति के उपरोक्त तथ्यों के आधार पर न्यायिक जांच कराए और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बस्तर विरोथी कहने वाले निरंकुश कुलपति को तत्काल बर्खास्त करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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