बस्तर दशहरा में चलने वाले दुमंजिला रथ निर्माण की लकड़ियां पहुंचना शुरू
जगदलपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। रियासत कालीन 75 दिवसीय बस्तर दशहरा में चलने वाले आठ पहिये के दुमंजिला विजय रथ बनाने के लिए माचकोट क्षेत्र से साल की लकड़ियों की पहली खेप शनिवार को जगदलपुर पहुंच गई। इसे बनाने के लिए बेड़ा उमरगांव और झार उमरगांव के लगभग 150 पारंपरिक कारीगर सिरहासार पहुंचेंगे। रथ निर्माण कारीगर लकड़ी के हर हिस्से को नापकर रथ के पहियों, ढांचे और ऊपरी हिस्से को आकार देंगे। लगभग 54 घनमीटर लकड़ी से तैयार होने वाला यह रथ विजयादशमी और अंतिम दिन चलेगा ।
बस्तर दशहरे में प्रति वर्ष एक नई रथनिर्माण करने की परंपरानुसार एक वर्ष चार पहिये वाला दुमंजिला रथ बनाया जाता है, वहीं दूसरे वर्ष आठ पहिये वाला दुमंजिला रथ बनाया जाता है। बस्तर टेंपल एस्टेट कमेटी के सचिव एवं जगदलपुर तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष आठ पहियों वाला रथ बनाया जाएगा। कारीगरों के जगदलपुर पहुंचते ही निर्माण शुरू होगा। मान्यता के अनुसार राजा पुरुषोत्तम देव को भगवान श्रीजगन्नाथ की कृपा से रथपति की उपाधि मिली थी। पुरी से जुड़े इस प्रसंग के बाद बस्तर दशहरा में रथ संचालन की परंपरा अनवरत 619 वर्षाें से जारी है । इतिहास में वर्ष 1408 में राजा पुरुषोत्तम देव को पुरी की पदयात्रा के बाद 16 पहियों वाला विशाल रथ मिलने का उल्लेख मिलता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

