अंबिकापुर : वैज्ञानिक जांच से सशक्त होगी कानून व्यवस्था, मंत्री राजेश अग्रवाल ने मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

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अंबिकापुर : वैज्ञानिक जांच से सशक्त होगी कानून व्यवस्था, मंत्री राजेश अग्रवाल ने मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी


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अंबिकापुर : वैज्ञानिक जांच से सशक्त होगी कानून व्यवस्था, मंत्री राजेश अग्रवाल ने मोबाइल फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी


अंबिकापुर, 24 मई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में आधुनिक कानून व्यवस्था और वैज्ञानिक अपराध अनुसंधान को एक नई मजबूती मिली है। प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने अंबिकापुर पुलिस ग्राउंड में एक अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

तकनीक से सुशासन को सशक्त बनाने की इस अभिनव पहल के अवसर पर लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज, विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

इस महत्वपूर्ण शुरुआत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंत्री अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तकनीक आधारित सुशासन और सुदृढ़ कानून व्यवस्था के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने मोबाइल फॉरेंसिक वैन को अपराध अनुसंधान प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया। मंत्री ने रेखांकित किया कि अब घटनास्थल पर ही त्वरित वैज्ञानिक जांच संभव हो सकेगी, जिससे पुलिस की जांच प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सटीक, तेज और विश्वसनीय बनेगी। यह वैन पुलिस विभाग के लिए एक चलती-फिरती वैज्ञानिक प्रयोगशाला की तरह कार्य करेगी, जिससे साक्ष्यों के नष्ट या दूषित होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी।

इस आधुनिक वैन के संचालन से राज्य की अपराध जांच प्रणाली को एक नई गति मिलना तय है। अब पुलिस को प्राथमिक वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए लंबी और जटिल प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जघन्य और गंभीर अपराधों के मामलों में घटनास्थल पर ही डिजिटल दस्तावेजीकरण, फोटोग्राफी, फिंगरप्रिंट परीक्षण और अन्य तकनीकी जांचें तुरंत की जा सकेंगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि साक्ष्यों को प्रयोगशाला तक भेजने में होने वाली देरी के कारण जो गुणवत्ता प्रभावित होती थी, यह वैन उस चुनौती का एक सटीक और प्रभावी समाधान है।

सुविधाओं की बात करें तो यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से पूरी तरह लैस है। इसमें घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम और नारकोटिक्स परीक्षण किट शामिल हैं। इसके अलावा डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, हाई रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी उपकरण, बुलेट होल स्क्रीनिंग, बैलिस्टिक जांच किट और गनशॉट रेजिड्यू परीक्षण जैसी उन्नत सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। कंप्यूटर आधारित डेटा विश्लेषण प्रणाली और सुरक्षित साक्ष्य संरक्षण व्यवस्था होने से हत्या, सड़क दुर्घटना, साइबर अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में मौके पर ही प्रारंभिक विश्लेषण किया जा सकेगा।

राज्य सरकार की इस पहल का अंतिम उद्देश्य अपराध अनुसंधान को तकनीकी रूप से सुदृढ़ कर न्याय प्रक्रिया में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ने से अदालत में दोषियों के खिलाफ अचूक प्रमाण प्रस्तुत किए जा सकेंगे, जिससे निर्दोष लोगों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी। तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में बढ़ाया गया यह कदम न केवल पुलिसिंग को स्मार्ट बनाएगा, बल्कि आम नागरिकों के मन में भी सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को और गहरा करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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